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कैलाश विजयवर्गीय के बेटे को टिकट पर राह आसान नहीं

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 8 2018 4:16PM
कैलाश विजयवर्गीय के बेटे को टिकट पर राह आसान नहीं
इंदौर, 08 नवम्बर (हि.स.)। आखिरकार बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और मालवा के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय अपने बेटे आकाश विजयवर्गीय को टिकट दिलवाने में सफल रहे। बीजेपी ने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की तीसरी सूची में कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय को इंदौर शहर की विस क्रमांक-03 से अपना उम्मीदवार बनाया है। लेकिन ये इतना आसान नहीं था। अपने बेटे को टिकट दिलाने के लिए कैलाश विजयवर्गीय को ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा। बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के खास माने जाने वाले कैलाश विजयवर्गीय के विरोधियों ने ही उनके लिए राह मुश्किल कर दी थी। विजयवर्गीीय की मांग को देखते हुए ही लोकसभा अध्यक्ष और इंदौर से सांसद सुमित्रा महाजन ने अपने बेटे मंदार महाजन के लिए टिकट मांग लिया था। इंदौर की जिस विस क्रमांक-03 से कैलाश विजयवर्गीय के बेटे को टिकट दिया गया है, वहां से बीजेपी नेता उषा ठाकुर विधायक हैं। ऐसे में वर्तमान विधायक का टिकट काटना पार्टी आलाकमान के लिए इतना आसान नहीं था। इसके लिए उषा ठाकुर को इंदौर देहात की मऊ विस सीट से टिकट दिया गया। ये कैलाश विजयवर्गीय की सीट है, जहां से वे विधायक हैं। अपने बेटे के लिए कैलाश विजयवर्गीय को अपनी सीट छोड़नी पड़ी। इतना ही नहीं इस बार कैलाश विजयवर्गीय चुनाव भी नहीं लड़ रहे हैं। अब उनकी सीट पर उषा ठाकुर लड़ेंगी, लेकिन उन्हें जीताने की जिम्मेदारी कैलाश विजयवर्गीय की होगी, क्योंकि उषा ठाकुर ने विजयवर्गीय के बेटे के लिए अपनी सीट छोड़ी है। वहीं मऊ में इस बार कांग्रेस के उम्मीदवार पूर्व विधायक अंतरसिंह दरबार है, जो क्षेत्र में मतदाताओं पर अपनी पकड़ की लिए जाने जाते है। खुद कैलाश विजयवर्गीय को दरबार के खिलाफ चुनाव लड़ने पर खुद को केवल मऊ तक सीमित करना पड़ा था। विजयवर्गीय अपने बेटे को टिकट तो दिला पाए हैं, लेकिन उनके बेटे के सामने कांग्रेस उम्मीदवार अश्विन जोशी है। अश्विन जोशी इस सीट से रिकार्ड तीन बार विधायक रह चुके हैं। उनके चाचा, महेश जोशी इस सीट से दो बार चुने जा चुके हैं। अश्विन जोशी ने इस सीट से चार बार चुनाव लड़ा और तीन बार जीते। तीनों बार वे बीजेपी की लहर में विजय हुए हैं। उनके चाचा महेश जोशी तीन बार चुनाव में उतरे और दो बार जीते। इस तरह देखा जाए तो जोशी परिवार इस सीट से सात बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुका है। इसके अलावा इस सीट में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र आते हैं, जो कांग्रेस का परंपरागत वोटबैंक है। अश्विन जोशी पिछला चुनाव हारने के बाद भी पूरे समय क्षेत्र में सक्रिय रहें हैं। विधायकी में हेट्रिक लगाने वाले जोशी हमेशा से इस सीट के प्रबल दावेदार रहे हैं। इसी के चलते कांग्रेस आलाकमान ने महेश जोशी जैसे कद्दावर नेता के बेटे पिंटू जोशी को टिकट ना देते हुए अश्विन जोशी को टिकट दिया। हिन्दुस्थान समाचार/निमिष/बच्चन
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