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पूरी तरह साफ नहीं हो पाया गुना जिले में चुनावी परिदृश्य

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 4 2018 9:38PM
पूरी तरह साफ नहीं हो पाया गुना जिले में चुनावी परिदृश्य
गुना, 04 नवंबर (हि.स.)। विधानसभा चुनाव को लेकर नामांकन दाखिल के तीसरे दिन भी गुना जिले में चुनावी परिदृश्य पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है। जिले की चार में से तीन विधानसभा गुना, चांचौड़ा और राघौगढ़ में ही दोनों प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी आमने-सामने हुए है, जबकि बमौरी में भाजपा के धुरंधर अकेले मैदान में डटे हुए हैं। क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाली इस विधानसभा से अभी भी कांग्रेस का महारथी नदारद बने हुए है। इस लिहाज से जिले की चारों विधानसभाओं में अब तक का जो परिदृश्य निकल कर सामने आ रहा है। उसमें भाजपा, कांग्रेस से बाजी मारी हुई है। जहां भाजपा दो दिन पहले ही जिले की चारों विधानसभाओं से प्रत्याशियों की घोषणा कर चुकी है तो कांग्रेस ने अब तक गुना, चांचौड़ा और राघौगढ़ में ही अपने पत्ते खोले है। गुना से मंडी संचालक चन्द्रप्रकाश अहिरवार को अपना प्रत्याशी बनाया है। यहां से भाजपा प्रत्याशी गोपीलाल जाटव है, वहीं चांचौड़ा से कांग्रेस ने भाजपा प्रत्याशी वर्तमान विधायक श्रीमती ममता मीना के मुकाबले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई एवं पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह को मैदान में उतारा है तो दिग्गी राजा के गृहनगर राघौगढ़ से वर्तमान विधायक एवं दिग्गी पुत्र जयवर्धन सिंह पर ही पुन: भरोसा जताया है। भाजपा यहां से वरिष्ठ भाजपा नेता भूपेन्द्र सिंह रघुवंशी को पहले ही अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। इसके चलते जहां चांचौड़ा में तगड़ा और गुना में रोचक मुकाबला होने की संभावना बन रही है तो राघौगढ़ दिलचस्प मोड़ पर आ गया है, जबकि गुना और बमौरी में संशय बरकरार बना हुआ है। दूसरी ओर बमौरी से प्रबल दावेदार रहे पूर्व मंत्री कन्हैयालाल अग्रवाल यहां से किसान नेता बृजमोहन सिंह आजाद को भाजपा की उम्मीद्वारी मिलने के बाद बगावत की राह पर चल पड़े है। वह आगामी 6 नवंबर को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल करने जा रहे है तो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कल 5 नवंबर को गुना आ रहे है। दिन भर लगी रही गुना, बमौरी पर टकटकी कांग्रेस के टिकट वितरण को लेकर रविवार को दिन भर गुना और बमौरी पर टकटकी लगी है, किन्तु यहां से कांग्रेस के महारथी सामने नहीं आ सके। शाम को आई 16 उम्मीद्वारों की सूची में गुना से चन्द्रप्रकाश अहिरवार का नाम सामने आ गया, किन्तु बमौरी को लेकर इंतजार बरकरार रहा। बमौरी में वर्तमान विधायक महैन्द्र सिंह सिसौदिया अब तक टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे है, किन्तु किसान नेता ब्रजमोहन सिंह आजाद के भाजपा प्रत्याशी के रुप में सामने आने से बदले राजनीतिक समीकरण में उनकी उम्मीद्वारी खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। चर्चाएं है कि अब यहां से पूर्व जिपं अध्यक्ष सुमेर सिंह गढ़ा को उम्मीद्वारी मिल सकती है या फिर सिंधिया परिवार से कोई व्यक्ति सामने आ सकता है। कांग्रेसी सूत्रों के मुताबिक ब्रजमोहन सिंह बमौरी से क्षेत्रीय प्रत्याशी माने जा रहे है, इस लिहाज से कांग्रेस में यहां इसी रणनीति पर चलने मंथन चल रहा है। रात में मिली चाचा-भतीजा को उम्मीदवारी जिले की चांचौड़ा और राघौगढ़ में कांग्रेस प्रत्याशियों की घोषणा शनिवार रात को सामने आई। चांचौड़ा से कांग्रेस ने पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह को मैदान में उतारा गया है तो राघौगढ़ से वर्तमान विधायक जयवर्धन सिंह पर ही पुन: भरोसा जताया गया है। गौरतलब है कि दोनों प्रत्याशी रिश्ते में चाचा-भतीजा है। लक्ष्मण सिंह जहां पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के अनुज है तो जयवर्धन सिंह पुत्र है। दोनों विधानसभाएं पूर्व राघौगढ़ राजघराने से प्रभावित मानी जाती हैं। ममता मीना और लक्ष्मण सिंह पहली बार होंगे आमने-सामने धुर विरोधी होने के बावजूद चांचौड़ा विधायक श्रीमती ममता मीना और पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह पहली बार चुनावी रण में आमने-सामने होंगे। भाजपा प्रत्याशी श्रीमती ममता मीना जहां चांचौड़ा में अपनी तीसरी पारी खेलने जा रहीं है तो कांग्रेस प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह पहली बार चांचौड़ा विधानसभा में अपना राजनीतिक भविष्य तलाश रहे है। ममता मीना ने चांचौड़ा से अपना पहला चुनाव 2008 में लड़ा था, जिसमें उन्हे कांग्रेस प्रत्याशी शिवनारायण मीना से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद पूरे पांच साल तक श्रीमती मीना क्षेत्र में जबर्रदस्त रुप से सक्रिय रही। जिसका फल उन्हे 2013 में मिला और जन आशीर्वाद से यह तेजतर्रार नेत्री पहली बार विधानसभा की सीढिय़ां चढऩे में सफल रहीं। इसके साथ ही इस चुनाव में उन्होने कांग्रेस प्रत्याशी शिवनारायण मीणा को हराकर अपनी पिछला हार का हिसाब भी चुकता कर लिया। एक बार फिर श्रीमती इसी विधानसभा से अपना भाग्य आजमा रहीं है। दूसरी ओर चार बार सांसद और दो बार विधायक रह चुके लक्ष्मण सिंह पहली बार चांचौड़ा विधानसभा से चुनाव लड़ रहे है। श्री सिंह राघौगढ से दो बार विधायक रहे है तो राजगढ़ से चार बार सांसद की जिम्मेदारी भी उन्हे मिली है। एक बार वह भाजपा से भी राजगढ़ सांसद रहे है। करीब नौ साल बाद उनकी चुनावी राजनीति में वापसी हुई है। हालंाकि इस बीच वह राजनीति से सन्यास की घोषणा भी कर चुके थे। अपेक्षाओं और चुनौती के बोझ से दबे भूपेन्द्र और जयवर्धन अब तक एकतरफा माना जा रहा राघौगढ़ विधानसभा का चुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। गौरतलब है कि वर्तमान विधायक जयवर्धन सिंह की कांग्रेस की तरफ से उम्मीद्वारी यहां से पहले ही तय मानी जा रही थी और शनिवार रात घोषित सूची में यह मान्यता सही भी साबित हुई है। जयवर्धन सिंह ने अपना पहला चुनाव वर्ष 2013 में भाजपा प्रत्याशी राधेश्याम धाकड़ को करीब 60 हजार मतों के बड़े अंतर से हराकर जीता था, वहीं भाजपा से प्रत्याशी वरिष्ठ भाजपा नेता भूपेन्द्र सिंह रघुवंशी है, जिनका नाम राघौगढ़ में सबसे कम मतों से हारने वाले प्रत्याशी के रुप में दर्ज है। भूपेन्द्र को दिवंगत नेता मूल सिंह दादा भाई के हाथों मात मिली थी। हालांकि तब उनके बेहतर माने गए प्रदर्शन को यह कहकर खारिज करने की कोशिश की गई थी कि सीधे किले का कोई सदस्य मैदान में नहीं था। चूंकि इस बार ऐसा नहीं है और पूर्ववर्ती राघौगढ़ राजघराने के युवराज मैदान में है। इसके चलते उनके समक्ष पिछला प्रदर्शन दोहराने की आसमानी अपेक्षा तो है हीं, साथ ही कांग्रेसी किला ढहाने की चुनौती का सामना भी उन्हे करना पड़ रहा है, वहीं ऐसी ही अपेक्षा और चुनौती का सामना कांग्रेस प्रत्याशी जयवर्धन सिंह भी कर रहे है। कारण कुछ समय पहले हुए नपा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा था। इसके बाद इस चुनाव के नतीजों पर जानकारों की निगाहें लग गईं है। रविवार को आरोन में कांग्रेस प्रत्याशी ने अपने चुनावी कार्यालय का उद्घाटन किया तो भाजपा प्रत्याशी भूपेन्द्र सिंह रघुवंशी ने कहा कि वह पूरी दमदारी के साथ चुनाव लड़ेंगे। उन्होने जनसंपर्क भी शुरु कर दिया है। दिग्गी सोमवार को भरवाएं कांग्रेस प्रत्याशियों के नामांकन पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कल 5 नवंबर को गुना आ रहे है। श्री सिंह इस दौरान कांग्रेस प्रत्याशियों के नामांकन दाखिल कराएंगे। जानकारी मुताबिक श्री सिंह का उडऩखटोला सुबह 10.15 बजे गुना हवाई पट्टी पर उतरेगा। इसके बाद सुबह 11 बजे वह कांग्रेस प्रत्याशियों का नामांकन दाखिल कराएंगे। इसके बाद विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेकर शाम 4 बजे भोपाल के लिए प्रस्थान कर जाएंगे। गोपीलाल के सामने आए चन्द्रप्रकाश भाजपा प्रत्याशी गोपीलाल जाटव के सामने कांग्रेस ने चन्द्रप्रकाश अहिरवार को मैदान में उतारा है। इसकी घोषणा रविवार की शाम को की गई। चन्द्रप्रकाश का नाम सामने आने के बाद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस विधानसभा में मुकाबला रोचक होने की संभावना बन रही है। भाजपा प्रत्याशी गोपीलाल जाटव पांच बार विधायक रहने के साथ एक बार मंत्री भी रह चुके है, साथ ही जिलाध्यक्ष का भाजपा जिलाध्यक्ष का दायित्व भी उन्होने निभाया है। इसके चलते वह काफी मजबूत प्रत्याशी माने जा रहे है, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी चन्द्रप्रकाश अहिरवार की माँ कृषि मंडी अध्यक्ष है, वहीं खुद वह मंडी संचालक का दायित्व निभा रहे है। युवा नेता चन्द्रप्रकाश भी कांग्रेस से मजबूत प्रत्याशी के रुप में सामने आ रहे है। जानकारों का मानना है कि दोनों प्रत्याशियों के बीच मुकाबला रोचक होने की संभावना बन रही है। केएल का बगावत की राह पर एक कदम और जिले की बमौरी विधानसभा से प्रबल दावेदारी जताने वाले पूर्व मंत्री कन्हैयालाल अग्रवाल ने बगावत की राह पर एक कदम और बढ़ा दिया है। पहले पत्रकारों के समक्ष पार्टी नेतृत्व के निर्णय पर अपनी कड़ी आपत्ति जताने के बाद निर्णय को कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का षड्यंत्र करार देने वाले केएल ने अब निर्दलीय उम्मीद्वार के रुप में नामांकन दाखिल करने की घोषणा कर दी है। केएल ने बताया कि वह आगामी 6 नवंबर को अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। गायत्री मंदिर के पास स्थित अपने कार्यालय से केएल समर्थकों के साथ रैली के रुप में दोपहर 12 बजे कलेक्ट्रेट पहुँचेंगे और नाम निर्देशन पत्र दाखिल करेंगे। हिन्दुस्थान समाचार/अभिषेक/मुुुुकेश/बच्चन
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