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‘गुड्डे-गुड्डियों’ का खेल नहीं ‘गुड्डू’ का भाजपा में आना!

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 3 2018 9:00PM
‘गुड्डे-गुड्डियों’ का खेल नहीं ‘गुड्डू’ का भाजपा में आना!
भोपाल/उज्जैन, 03 नवम्‍बर (हि.स.)। कांग्रेस से उज्जैन संसदीय क्षेत्र से सांसद रह चुके प्रेमचंद गुड्डू का भाजपा में आना ‘गुड्डे-गुड्डियों ’ का खेल नहीं है। भाजपा आला कमान ने एक सोची समझी रणनीति के तहत कांग्रेस को ऐन वक्त पर ऐसा जख्म दिया है जिसे सहलाने पर भी कार्यकर्ता बिखरते हुए दिखेंगे। इस जख्म की मलहम पट्टी कब होगी यह भविष्य बताएगा। लेकिन फिलहाल कांग्रेस के खेमे में छाया सन्नाटा बता रहा है कि कहीं न कहीं बड़ा नुकसान कांग्रेस के खाते में दर्ज होगा। हालांकि भाजपाइयों का अंदर ही अंदर उबल रहा गुस्सा भी भाजपा को भीतरघात के रूप में देखने को मिल सकता है। इस आशंका का निवारण तभी होगा जब गुड्डू और उनके समर्थकों का समन्वय भाजपा के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के साथ ठीकठाक बैठ जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि एक समय भाजपा और हिंदूवादी संगठनों के खिलाफ ‘कड़वा’ बोलने वाले प्रेमचंद गुड्डू अब अपनी नैया इन्हीं खेवनहारों के भरोसे पार लगा पाएंगे। राजनीति कितनी विचित्र होती है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजनीति की शुरुआत से भाजपा तथा हिंदूवादी संगठनों के घोर विरोधी रहे प्रेमचंद गुड्डू अब इन्हीं लोगों के साथ एक जाजम पर बैठकर भाजपा को बढ़त दिलाने की रणनीति बनाएंगे। यह सब कितनी जल्दी घटित होगा, देखने वाली बात होगी। क्योंकि सोचना, समझना और लक्ष्य तक पहुंचना इसमें कहीं न कहीं विरोधाभास आएगा ही। कांग्रेस के वे नेता जो प्रेमचंद गुड्डू के साथ राजनीति कर चुके हैं, उनका कहना है कि प्रेमचंद गुड्डू आक्रामक और छापामार राजनीति करते हैं। जबकि भाजपाई साधारण तौर पर नपी-तुली राजनीति करते हुए समन्वय से काम बनाते हैं। ऐसे में नरम दल और गरम दल जैसी स्थिति का सामना भी आने वाले 25 दिनों तक भाजपा को करना पड़ सकता है। इधर कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ताओं तथा पदाधिकारियों से हिस प्रतिनिधि की हुई चर्चा में तस्वीर के दो रूप सामने आ रहे हैं- कांग्रेस के पदाधिकारी और रणनीतिकारों का कहना है कि इस झटके को उज्जैन जिले में कांग्रेस सहन कर लेगी। कारण बताते हैं कि पिछले दस सालों में शहर और ग्रामीण राजनीति कर रहे जिले के विभिन्न कांग्रेस नेताओं को गुड्डू ने अपनी रणनीति से घर बैठा दिया था। पिछले नगर पालिका और विधानसभा चुनाव में भी सिर्फ उन्हीं की चली थी। अब वे स्वयं को बंधनमुक्त समझ रहे हैं। ऐसे में वे खुलकर काम करेंगे और गोलबंद होकर कांग्रेस को जिताने के लिए भिड़ जाएंगे। भाजपा के पदाधिकारियों और अनुभवियों से चर्चा में यह निष्कर्ष आया कि श्री गुड्डू के भाजपा में आने से उज्जैन जिले की राजनीति पर बहुत बड़ा प्रभाव नहीं गिरेगा। कांग्रेस को झटका जरूर लगा, लेकिन भाजपा पहले से ही प्लस में थी और आगे भी प्लस में ही रहेगी। वे यह बात भी जोड़ते हैं कि नफा-नुकसान देखा जाए तो भाजपा कार्यकर्ताओं को गुड्डू और उनके समर्थकों के साथ तालमेल बैठाने में समय लगेगा। यदि महत्वाकांक्षाएं जाग्रत रहीं तो आने वाले समय में दायित्वों को लेकर प्रतिस्पर्धा होगी। ऐसे में पार्टी के भीतर माहौल खराब होने की आशंका अधिक रहेगी। एक जिम्मेदार दायित्ववान ने चर्चा को विराम देते हुए कहा- देखो, प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष की बगैर सहमति के इतना बड़ा निर्णय पार्टी ले नहीं सकती। यदि उन लोगों ने सहमति दी है तो कोई बड़ा कारण होगा। ऐसे में हमें तो सभी को साथ में लेकर चलना है। लक्ष्य फिर से सरकार बनाने का है। अपनी-अपनी सरकार कौन बनायेगा, यह बाद में देख लेंगे। हिन्‍दुस्‍थान समाचार/ललित/राजू/मुकेश/बच्चन
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