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सिंधिया नहीं लड़ रहे उज्जैन से चुनाव !

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 26 2018 4:46PM
सिंधिया नहीं लड़ रहे उज्जैन से चुनाव !

उज्‍जैन, 26 अक्‍टूबर (हि.स.)। राजनीति की दुनिया में खबरों के गुब्बारे उडऩे और हवा निकलने में न तो समय लगता है और न ही ऊर्जा खर्च होती है। चर्चाओं के दौर क्षणिक तूफान तो लाते हैं लेकिन जिनके लिए तूफान लाया जाता है, अनेक बार वे स्वयं उसमें स्वयं को फंसा महसूस करते हैं। बाद में स्थितियां समर्थकों के माध्यम से साफ की जाती हैं। ऐसी ही एक तस्वीर से धूल साफ हो गई है... ज्योतिरादित्य सिंधिया उज्जैन उत्तर से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। 

एआईसीसी के सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश में कांग्रेस के खेवनहारों में से एक ज्योतिरादित्य सिंधिया स्वयं के संसदीय क्षेत्र से ही किसी विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ेंगे। दिल्ली के सूत्रों ने साफ तौर पर खंडन किया कि श्री सिंधिया उज्जैन उत्तर से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। इन सूत्रों ने इस बात से भी इंकार नहीं किया कि कांग्रेस का फोकस मालवा-निमाड़ की 66 सीटों पर है जो कि विधानसभा में सरकार बनाने के लिए बड़ा महत्व रखती है। 

जानकारों ने चर्चा में इस प्रतिनिधि को यह भी कहा कि यदि श्री सिंधिया उज्जैन आकर चुनाव लड़ते हैं तो वे 66 सीटों पर प्रभाव गिरा सकते हैं लेकिन पूरे मध्यप्रदेश में उनके मूवमेंट पर असर गिर सकता है। कांग्रेस नहीं चाहती कि कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसी हस्तियां किसी क्षेत्र में सिमट जाएं। 

दिल्ली में हो रही मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव की समीक्षा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने साफ कर दिया है कि मालवा-निमाड़ की 66 सीटों में से कांग्रेस के खाते में वर्ष 2013 में मात्र 9 सीटें आई थी। 56 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। ऐसे में इस बार मालवा-निमाड़ में पूरी ताकत झोंककर कांग्रेस अपना आंकड़ा 40 सीटों के ऊपर ले जाना चाहती है। इस बारे में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और मध्यप्रदेश के सहप्रभारी संजय कपूर संकेत दे चुके हैं कि मालवा-निमाड़ में भाजपा को सीधी चुनौती दी जाएगी। 

इस सबके चलते वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि सिंधिया को परंपरागत क्षेत्र से हटाकर नए क्षेत्र में प्रत्याशी बनाने से पार्टी को दीर्घकालीन फायदा फिलहाल तो नहीं दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार इन बातों के बीच सिंधिया भी अपने समर्थकों को संकेत कर चुके हैं कि उज्जैन से चुनाव लडऩा फिलहाल उनकी प्राथमिकता में नहीं है। ज्ञात रहे मालवा और निमाड़ एक समय कांग्रेस का गढ़ हुआ करते थे, लेकिन अब ये गढ़ भाजपा का बन चुका है। 

राहुल का दौरा तय करेगा रणनीति

एआईसीसी के सूत्रों के अनुसार 29 अक्टूबर को उज्जैन के दशहरा मैदान पर होने वाली राहुल गांधी की आमसभा के बाद मालवा-निमाड़ को लेकर कांग्रेस पत्ते खोलेगी। सूत्र बताते हैं कि इस आमसभा में मालवा के अलावा निमाड़ से भी कार्यकर्ताओं को लाने पर मंथन चल रहा है। इस आमसभा को ऐतिहासिक बनाने की दिशा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने पूरी ताकत झोंक दी है। क्षेत्रीय नेताओं को भी संदेश दिया गया है कि अधिक से अधिक भीड़ जुटाई जाए। 
आलाकमान का सोच है कि शक्ति प्रदर्शन के बाद टिकटों का वितरण किया जाए। हालांकि सूत्रों का कहना है कि मालवा-निमाड़ की टिकटों पर लगभग अंतिम स्थिति बन चुकी है। आमसभा के पूर्व घोषित करने पर विरोध के स्वर फूटेंगे जो आमसभा को प्रभावित करेंगे। इसीलिए सूची की घोषणा आमसभा के बाद होगी। 
 
हिन्‍दुस्‍थान समाचार/ललित/राजू 
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