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राहुल के जाने के बाद कांग्रेस में सबसे अधिक घमासान..!

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 30 2018 8:41PM
राहुल के जाने के बाद कांग्रेस में सबसे अधिक घमासान..!

भोपाल/उज्‍जैन । अ.भा. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी इस समय मध्‍यप्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सूबे में तबातोड़ रैलिया और रोड शो कर रहे हैं। जिससे सुस्‍त पड़ी कांग्रेस में नई जान आ गई है। राहुल की रैलियां और रोड शो कितना असर दिखागा यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इतना जरूर है कि राहुल के रोड शो में जिस तरह भीड़ उमड़ रही है उसे देखते हुए कार्यकर्ताओं में जोश भर गया है, एक तरफ राहुल प्रदेश में बिखरी पड़ी कांग्रेस को एकजुट करने में लगे हुए है तो दूसरी ओर टिकट को लेकर मचे घमासान कांग्रेस के नेताओं को परेशानी में डाल दिया है। 

 
हाल ही उज्जैन में हुई आमसभा के दौरान मंच पर जो घटनाक्रम घटे, उसका पाश्र्व कुछ भी रहा हो, राहुल गांधी के जाने के बाद सोमवार रात से मंगलवार तक जो कुछ घट गया उसने शहर कांग्रेस में एक बड़ी दरार पैदा कर दी है। अब कांग्रेस के बुजुर्ग नेता कह रहे हैं कि डेमेज कंट्रोल नहीं किया तो पार्टी को जिले की सातों सीटों पर नुकसान उठाना पड़ेगा। 
 
उज्जैन नगर में दो विधानसभा सीटें उज्जैन उत्तर और उज्जैन दक्षिण नाम से है। इन दोनों सीटों पर टिकट के लिए दावेदारी करने वाले दावेदारों के आका दिल्ली की राजनीति को सीधे प्रभावित करते हैं। दोनों सीटों से प्रत्याशी एक-एक खड़ा होगा, लेकिन राहुल गांधी के उज्जैन से प्रस्थान के बाद इन दोनों सीटों पर एक त्रिकोण बन गया है। कुछ लोग इस त्रिकोण में गुटबाजी देख रहे हैं तो कुछ ने इसे वर्चस्व की लड़ाई मान लिया है। इस बीच शहर कांग्रेस के अध्यक्ष और एक पूर्व अध्यक्ष भारी दबाव में आ गए हैं। उनके नजदीकी सूत्रों के अनुसार इन्होंने दावेदारों को साफ कह दिया है कि फैसला दिल्ली से होगा, जो होगा हम मान लेंगे, अब सभी लोग मान जाओ और कांग्रेस के लिए एकजुट रहो। 
 
पर्दे के पीछे की कहानी तब लिखना शुरू हो गई थी जब मंच पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राहुल गांधी को राजेन्द्र भारती से मिलवाया। वहीं कमलनाथ ने कागज पर जेब से पेन निकालकर कुछ नोट किया। जिस प्रकार से श्री भारती का परिचय संपन्न हुआ उस घटनाक्रम ने चर्चाओं को जन्म दे दिया। 
 
कार्यकर्ताओं के बीच से आरोप लगे कि उज्जैन उत्तर में कमलनाथ समर्थक माया त्रिवेदी भी बड़ी दावेदार थी, उनको भी मंच पर लाया जाना था। इधर कार्यकर्ताओं का तीसरा गुट इस बात को लेकर नाराज था कि इस पूरे कार्यक्रम में उज्जैन दक्षिण से टिकट के दावेदार राजेन्द्र वशिष्ठ को दरकिनार किया गया। उनकी अनुपस्थिति दर्शा रही थी कि कांग्रेस के कुछ नेता दक्षिण से वशिष्ठ गुट को पूरी तरह काटकर किसी नए चेहरे को लाने की जुगत में है। 
 
जोर आजमाइश के इस दौर में कार्यकर्ताओं का गुबार सोमवार शाम तक फटने लग गया था। चर्चाओं के गुब्बारे उडऩे लगे वहीं आरोपों की हवाएं भी गुब्बारों में भरी जाने लगी। यह आरोप मंगलवार सुबह तक राहुल गांधी के नजदीकी नेताओं तक पहुंच चुके थे। इन बातों को दिल्ली तक कितनी गंभीरता से लिया जाएगा यह अलग बात है।
 
 कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि शहर कांग्रेस के कुछ नेता जरूर कुछ बड़े नेताओं के निशाने पर आ गए हैं। ज्ञात रहे जिले में राजेन्द्र भारती जहां सीधे-सीधे सिंधिया गुट के सिपहसलार हैं वहीं माया त्रिवेदी को शुरू से ही कमलनाथ का कट्टर समर्थक माना जाता है। इधर राजेन्द्र वशिष्ठ को दिग्विजयसिंह का कट्टर समर्थक माना जाता है। श्री वशिष्ठ के कुछ समर्थकों का चर्चा में दावा है कि दिग्विजयसिंह मध्यप्रदेश से केवल एक टिकट मांग रहे हैं, और वह टिकट राजेन्द्र वशिष्ठ के लिए मांगा जा रहा है। त्रिभूज के इन तीन कोणों पर तीन दिग्गज नेता के समर्थक बैठे हैं। ऐसे में कांग्रेस आला कमान किसके साथ कितना न्याय कर पाएगा, यह भविष्य के गर्भ में है। 
 
सूत्र बताते हैं कि इस गुटबाजी का फायदा प्रदेश कांग्रेस के एक पूर्व अध्यक्ष उठाने की फिराक में हैं। वे चाहते हैं कि येन-केन प्रकारेण उज्जैन दक्षिण से उनके समर्थक को टिकट मिल जाए। वहीं अजयसिंह भी अपने किसी समर्थक को एक टिकट दिलवाने की पुरजोर कोशिश में लगे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार यह आपाधापी टिकट वितरण के बाद गुटबाजी में बदली तो नाम घोषित होते ही कांग्रेस पराजय की ओर प्रस्थान कर सकती है। 
 
हिन्‍दुस्‍थान समाचार/ललित/राजू 
 
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