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पुत्रवधू को टिकट नहीं मिला तो भाजपा के लिए मुसीबत बनेंगे बाबूलाल गौर

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 4 2018 9:45AM
पुत्रवधू को टिकट नहीं मिला तो भाजपा के लिए मुसीबत बनेंगे बाबूलाल गौर

संजीव

भोपाल, 04 नवंबर(हि.स.)। सत्तारूढ़ भाजपा के लिए राजधानी की हाईप्रोफाइल और सबसे सुरक्षित सीट माने जाने वाली गोविंदपुरा विधानसभा सीट जी का जंजाल बन चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर इस सीट से पिछले 44 साल से विधायक है। जाहिर है इतने लंबे समय से विधायक रहने के कारण गौर का अपने क्षेत्र में व्यापक जनाधार है। अगर इसे बाबूलाल गौर का गढ़ कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। भाजपा ने राजधानी की सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है, लेकिन गोविंदपुुरा सीट को होल्ड पर रखा है।

कारण, भाजपा इस बार बाबूलाल गौर को उनकी उम्र को देखते हुए टिकट नहीं देना चाहती है। इसी उम्र का हवाला देकर उनकी शिवराज मंत्रिमंडल से विदाई कर दी गई थी। सुरक्षित होने के कारण इस सीट पर राजधानी के कई नेताओं की निगाहें लगी हैं। जिनमें महापौर आलोक शर्मा, बीजेपी पार्षद कंवल मिश्रा और राज्य पर्यटन विकास निगम  के अध्यक्ष तपन भौमिक प्रमुख हैं, लेकिन गौर अपने या अपनी पुत्रवधू पूर्व महापौर कृष्णा गौर के टिकट के लिए अड़े हुए हैं। 

 
कृष्णाजी चुनाव तो लड़ेंगी, चाहे टिकट मिले या नहीं
बाबूलाल गौर का कहना है कि कृष्णाजी तो चुनाव लड़ेंगी, चाहे पार्टी उन्हें टिकट दे या नहीं दे। मतलब साफ है कि गौर ने पार्टी को इशारा कर दिया है कि अगर उनकी पुत्रवधू को टिकट नहीं मिला तो वह निर्दलीय मैदान में उतरेंगी। अगर ऐसा हुआ तो भाजपा को यह सीट निकालना मुश्किल हो जाएगा। गौर कांग्रेस नेताओं के संपर्क में भी हैं। शनिवार को कांग्रेस नेता गोविंद गोयल ने गौर से उनके निवास पर जाकर मुलाकात की है। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष क मलनाथ ने भी शनिवार को गौर से फोन पर बात की है। दूसरी ओर, कांग्रेस द्वारा शनिवार देर रात जारी की गई उम्मीदवारों की सूची में भी गोविंदपुरा सीट को होल्ड पर रखा गया है।  
 
विरोध भी हो रहा है गौर का
गोविंदपुरा सीट पर गौर या कृष्णा गौर को टिकट दिए जाने की संभावना पर कुछ भाजपा नेताओं के इशारे पर कुछ समय पूर्व शक्तिनगर में भाजपा नेताओं को सदï्बुद्धि देने के लिए सुंदरकांड का आयोजन किया था। कार्यकर्ता खुद की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है सालों तक पार्टी की सेवा करने के बाद जब मेवा बंटने की बारी आती है तो परिवारवाद हावी हो जाता है। कार्यकर्ताओं के मुताबिक सालों-साल से पार्टी के लिए पसीना बहा रहे गोविंदपुरा विधानसभा के कार्यकर्ता इस बात से परेशान हैं कि बीते 10 चुनाव से यहां बाबूलाल विधायक हैं और इस साल होने वाले चुनाव में उनकी बहू को टिकट मिलता है, तो सालों का इंतजार और लंबा खिंच जाएगा। 
 
50 फीसदी वोटर पिछड़े जाति के
गोविंदपुरा विधानसभा सीट पर 50 फीसदी वोटर्स पिछड़ी जाति से है। ये बीजेपी के परंपरागत वोटर हैं। सीट पर पिछले 44 साल से एक ही उम्मीदवार जीतते आ रहा है। बाकी 50 फीसदी में सवर्ण व दलित वर्ग है। 
 
हिन्दुस्थान समाचार
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