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मध्‍यप्रदेश में विधानसभा चुनाव: दागी-बागी के साथ लड़ा जायेगा चुनाव

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 13 2018 3:54PM
मध्‍यप्रदेश में विधानसभा चुनाव: दागी-बागी के साथ लड़ा जायेगा चुनाव

 

 
भोपाल/छतरपुर, 13 अक्‍टूबर (हि.स.)। 15वीं विधानसभा चुनाव की तारीख घोषित होते ही दागी-बागी और भितरधाती प्रत्याशियों के चुनाव लड़ऩे की होड़ सी लग गई। चुनावी बयार के साथ नग़र के तिराहो, चायपान की दुकानों सार्वजनिक जगहों पर सियासी माहौल गर्माया हुआ है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में 14 वीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव में जहां भाजपा को 44.86 प्रतिशत मत प्राप्‍त हुए थे तो वहीं कांग्रेस को 36.37 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। दोनों में 8.5 प्रतिशत का अंतर हैं।
 
15वीं विधानसभा में बनते बिगड़ते समीकरण के बीच दागी बागी और भितरधाती उम्मीदवारों पर दोनों की नजर हैं। भाजपा नाराज नेताओं को मनाने ओर बाहरी नेताओं की घर वापसी की कोशिश में जुटी है तो टिकट वितरण के बाद गुटबाजी बढऩे की संभावना से भी इंकार ऩही किया जा सकता। इस बार के चुनाव को लेकर मचे धमासान से देखने पर साफ संकेत मिलता हैं कि चुनाव में गुटबाजी बगावत का मंजर देखने को मिलेगा। अभी तक न तो भाजपा ने अपने उम्‍मीदवारों की घोषणा की है और न कांग्रेस ने। दोनों प्रमुख पार्टियां अपने-अपने प्रत्‍याशियों के चयन को लेकर माथापच्‍ची में जुटी है। कोई प्रत्‍याशी पार्टी से बगावत न करें इस पर भी ध्‍यान दिया जा रहा है। 
 
पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने 60 -60 सिंगल नामों का पैनल तैयार कर लिया है जिससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि अगले सप्‍ताह तक उम्‍मीदवारों की पहली सूची जारी हो सकती है। दूसरी तरफ जिन सीटों पर एक से ज्‍यादा उम्‍मीदवार अपनी दावेदारी कर रहे हैं उन पर पार्टी का अभी भी मंथन जारी है। प्रदेश की राजनीति में बागी नेता भाजपा के लिए चुनौती बनते दिख रहे है, तो किसान बेरोजगार युवा समाज वर्ग की नाराजगी दूर करने के साथ-साथ बागियों को साधना मुश्किल हो रहा है।
 
मौजूदा विधायकों की जो स्थिति बताई गई है उसके मुताबिक पार्टी को चेहरे बदलने पड़ सकते हैं तो कांग्रेस के लिए भी एक बड़ी परेशानी जिताऊ चेहरे का अभाव है। दूसरा बड़ा कारण क्षत्रपों के बीच भारी गुटबाजी भी एक बड़ा कारण हैं। तो भाजपा के लिए एंटी इनकंबेंसी सबसे बड़ा मुद्दा है। शाह के फार्मूले की बात करें तो टिकट के लिए जो गाइड लाइन तैयार की गई हैं उसमें वर्तमान की भी टिकट कट सकती हैं। वजह चुनाव जीतने के बाद कई विधायकों ने अपने क्षेत्र में विकास कार्य ही ऩही कराये। मौजूदा विधायकों में उन्ही को टिकट मिलने की संभावना हैं जिनकी छवि बेहतर पाई जाएगी। सर्वे रिपोर्ट में मौजूदा विधायकों का रिपोर्ट कार्ड खराब है।
 
गौरतलव है कि मध्‍यप्रदेश की 230 विधानसभाओं में एक साथ 28 नवंबर को संपन्न होने वाले चुनाव के महाकुंभ में वोटो की आहुति देने बिलो से निकलकर भावी उम्मीदवार छुटभैये नेताओं ने मतदाताओं से सम्पर्क साधना शुरू कर दिया है। कभी पार्षद का चुनाव न जीतने वाले ऐसे नेता भी इस बार विधानसभा चुनाव में दावेदारी को लेकर एड़ी चोटी का जोर लगाकर चुनाव लडऩे का दम भर रहे हैं। भले ही पार्टी ने किसी उम्मीदवार के नाम की धोषणा ऩही की है पर छुटभैये भी मुगेंरी लाल के हसीन सपना देखने में लगे है। अगर प्रदेश के बुन्‍देलखंड की बात की जाएं तो यहां से हर बार पांच-पांच मंत्री इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्‍व करते हैं फिर भी इस इलाके में पानी-सड़क बिजली और रोजगार आज भी प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। 
 
वहीं निगाहें महाराजपुर विधानसभा पर जिले के अंतिम छोर उप्र की सीमा रेखा पर बसे हरपालपुर क्षेत्र की सबसे चर्चित महाराजपुर विधानसभा सीट पर दावेदारों की फौज के साथ टिकट न मिलने पर कई नेता निर्दलीय चुनाव लडऩे सक्रिय दिख रहे हैं।
 
उधर दिग्गज सांसद मंत्री की दावेदारी की चर्चाओं के बीच सभी की निगाहें टिकी हुई है। भले ही कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा, आप, शिवसेना, सपाक्स व निर्दलीय से अभी तक प्रत्याशियों के नाम की धोषणा नही हुई। वहीं सपा मुखिया ने भी जाल फेंककर कांग्रेस भाजपा से वंचित हुए नेताओं को पार्टी से चुनाव लडऩे का खुला आंमत्रण दिया है। ऐसे में बिना टिकट की डील पर कौन सा बड़ा नेता दल बदलेगा यह आने वाला समय बतायेगा। बहरहाल इस बार के चुनाव में परिवर्तन की लहर को लेकर मतदाताओं ने क्षेत्र के जन प्रतिनिधि के निर्णय की मुहर लगा दी हैं। सिर्फ उम्मीदवार के नाम की धोषणा होनी बाकी है।
 
हिन्‍दुस्‍थान समाचार/राजू/पवन/डॉ. मयंक 
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