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पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने किया सरेंडर, भेजे गए जेल

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 15 2019 1:56PM
पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने किया सरेंडर, भेजे गए जेल
रांची,15 अप्रैल (हि.स.)। झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने यहांं सोमवार को अपर न्यायायुक्त एस एस प्रसाद की कोर्ट में सरेंडर किया। साव ने सरेंडर करने की बात जमानत याचिका दायर की जिसे कोर्ट ने नामंजूर कर दिया और उन्हेंं 23 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया । कोर्ट परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए योगेंद्र साव ने कहा कि यह सरकार तानाशाही सरकार है। उनके खिलाफ फर्जी मुकदमा बनाया गया है। उन्होंने कहा कि एक ही घटना को लेकर आठ-दस मुकदमा किया गया है। उन्होंने कहा कि हम कोई चोर -डकैत नहीं है। जन आंदोलन किए थे, इसलिए जेल भेजा जा रहा है। बड़कागांव में गरीबों की जमीन को हड़पा जा रहा था। जिस का विरोध करने पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी से बात हुई है मेरी बेटी हजारीबाग लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेगी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने साव को रांची की निचली अदालत में सरेंडर करने का निर्देश दिया था। 12 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई की थी। सुनवाई के बाद जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने साव से कहा था कि वह सोमवार तक सरेंडर कर दे। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 4 अप्रैल को जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने की वजह से राज्य के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव की जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद योगेंद्र साव ने शीर्ष अदालत में एक अर्जी दाखिल कर मांग की कि जब तक हजारीबाग से उनके मामले रांची ट्रांसफर नहीं हो जाते तब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाए। साथ ही योगेंद्र साव ने कोर्ट से यह भी बताने के लिए कहा था कि उन्हें कहां सरेंडर करना है। इतना ही नहीं योगेंद्र साव ने कोर्ट से अपील की थी कि उनके खिलाफ चल रहे सभी मामलों का स्पीड ट्रायल कराया जाए। ज्ञातव्य है कि योगेंद्र साव वर्ष 2013 में हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री थे। उनके खिलाफ डेढ़ दर्जन मामले लंबित हैं। इसमें दंगा और हिंसा के लिए लोगों को उकसाने के आरोप भी शामिल है। यह मामला बड़कागांव थाना कांड संख्या 228/ 16 से जुड़ा है। साव ने हजारीबाग के बड़कागांव मे एनटीपीसी प्लांट के खिलाफ महारैली निकाली थी। जिसमें भीड़ को उकसा कर हिंसा फैलाने का आरोप है ।भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी थी। घटना में 4 लोगों की मौत हो गई थी। 6 प्रशासनिक पदाधिकारी भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके खिलाफ दर्ज मामलों में हत्या का प्रयास, आर्म्स एक्ट , कोल एक्ट सहित कई अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। हिन्दुस्थान समाचार/विकास/विनय
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