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संथाल में भाजपा को भीतरघात की आशंका

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 10 2019 8:38PM
संथाल में भाजपा को भीतरघात की आशंका
गोड्डा, 10 अप्रैल (हि.स.)। संथाल की सीट पर भाजपा के बीच भीतरघात की संभावना ने सूबे के आला नेताओं के माथे पर बल पैदा कर दी है। गोड्डा और राजमहल लोस सीट में भाजपा का एक खेमा अलग थलग पड़ चुनावी समीकरण में पेंच डालने की जुगत में है। जिसको लेकर पार्टी गंभीर दिख रही है। संथाल की सीट भाजपा के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने गोड्डा दौरा के दौरान इसको लेकर कई बार कार्यक्रम करने की घोषणा करने एवं देश की एक महत्वपूर्ण पेंशन योजना की शुरूआत गोड्डा से कर के दे दी थी। दरअसरल संथाल झामुमो का गढ़ कुछ ऐसा रचा बसा है कि झारखंड को अलग स्वरूप देने वाले गुरूजी शिबू सोरेन राज्य में सत्ता के लिए प्रबल दावेदार पार्टी के सुप्रिमो है। यही कारण है कि भाजपा ने संताल के आदिवासी बोरियो विधायक ताला मारंडी को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी थी। पर चंद दिनों में ही उन्होंने पार्टी मत से अलग जाकर आदिवासी क्षेत्र के एसपीटी एक्ट के संबंध में होने वाले संशोधन के दौरान अलग विरोधी राय रख सब को चौंका दिया एवं खुद अपने बेटे की शादी नाबालिग लड़की से करने को लेकर विवाद में रहे तथा अपनी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी गवां दी थी। लोक सभा चुनाव में वे राजमहल सीट से उम्मीदवारी के लिए कोशिश की थी एवं निराशा मिलने पर झामुमो का दामन थामने का भी ईशारा दिया था। दूसरी ओर झामुमो से भाजपा में आए हेमलाल मुर्मू को भी भाजपा ने पूरा मौका देकर संथाल में सर्वमान्य नेता के रूप आदिवासियों के बीच पहचान बनाने की मंशा साफ कर दी है। लगातार दो बार सांसद व विधायक के चुनाव हारने के बाद भी एक बार फिर से उन्हें राजमहल सीट की कमान सौंपी है। इससे भाजपा के कई कार्यकर्ता नाराज दिख रहें है। साथ ही इसका असर अन्य क्षेत्रों पर पड़ना लाजमी है। जहां तक गोड्डा लोक सभा क्षेत्र का मामला है, जिले के कई भाजपा नेता तीसरी बार भाजपा से बतौर सांसद लड़ रहे निशिकांत दूबे की बढ़ती लोकप्रियता से अपना भविष्य समाप्त होता देख रहे है। महागामा विधान सभा में यह बात कई बार मुखर होकर सामने आ चुकी है। यही कारण है कि सुबे के मुखिया मुख्य मंत्री रघुवर दास खुद संताल के हाल में ही कई दौरे कर कार्यकत्ताओं से मिल उन्हें एक जूट करने का प्रयास किया है। अब देखना यह होगा कि यह भीतरघात भाजपा को किस कदर चुनावी समर में असर डालता है। पर पार्टी का मानना है कि घर में हुए विवाद का असर मैदान में नहीं दिखेगा। हिन्दुस्थान समाचार/रंजीत/विकास/विनय
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