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गहरे आर्थिक संकट के दौर में बिजली उद्योग, 2.40 लाख करोड़ का पावर प्लांट है ठप

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 7 2019 8:28PM
गहरे आर्थिक संकट के दौर में बिजली उद्योग, 2.40 लाख करोड़ का पावर प्लांट है ठप
बोकारो, 07 अप्रैल (हि.स.)। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के फेडरल एक्सक्यूटिव की बैठक रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी में आयोजित की गयी। बैठक में पारित प्रस्ताव में भाजपा, कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों से मांग की गयी कि वे बिजली सेक्टर और बिजली कर्मचारियों के हितों से जुड़े ज्वलंत विषयों और निजीकरण के नाम पर बिजली के क्षेत्र में चल रहे मेगा घोटालों को रोकने के लिए अपनी नीति को स्पष्ट करें और चुनाव बाद की रणनीति बताएं। बैठक को संबोधित करते हुए फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और अन्य राजनीतिक दलो के अध्यक्षों को पत्र भेजकर बिजली के निजीकरण की नीति से हो रहे भारी नुक्सान और आम जनता पर पड़ रही महंगी बिजली की मार के साथ ही बिजली कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाली और संविदा तथा ठेके के कर्मचारियों को नियमित करने का सवाल भी उठाया है। पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि विगत वर्षों में बिजली और कोयला क्षेत्र के निजीकरण के प्रयासों के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। बिजली के क्षेत्र में निजी घरानों को मनमानी छूट देने का नतीजा यह है कि लगभग 2.40 लाख करोड़ रुपये के बिजली संयंत्र ठप पड़े हैं और स्ट्रेस्ड असेट हो गए हैं, जिसका खामियाजा इन्हे कर्ज देने वाले सरकारी क्षेत्र के बैंकों को भी उठाना पड़ रहा है। मुख्य संरक्षक पदमजीत सिंह ने कहा कि गलत ऊर्जा नीति के चलते बिजली कंपनियों पर 10 लाख करोड़ रु से अधिक का घाटा और कर्ज हो गया है। भ्रष्टाचार के चलते निजी घरानों द्वारा कोयला आयात और पावर प्लांट के आयात के नाम पर 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला सामने आया है, जिस पर खुफिया रिपोर्ट आ चुकी है, जिसे दबाया जा रहा है। केंद्रीय विद्युत् प्राधिकरण को शक्ति देने की बात भी राजनीतिक दलों के घोषणापत्र में हो, जिससे भविष्य में मनमानी परियोजनाएं न बनने पायें.लीगल सचिव अशोक कुमार जैन ने कहा कि पावर फेडरेशन ने मांग की है कि राजनीतिक दल यह वायदा करें कि वे एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर ( जिसमे बिजली कर्मचारी व् उपभोक्ता भी हों ) इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की समीक्षा करेंगे। खासकर जल्दबाजी में बिजली बोर्डों का विघटन कर कई कार्पोरेशन बनाये जाने के दुष्परिणामों और निजीकरण हेतु किये जाने वाले और संशोधनों विशेषतया इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2014 तथा 2018 को पूरी तरह समाप्त करने पर विचार करेंगे। उच्च स्तरीय समिति का मुख्य उद्देश्य बिजली निगमों का एकीकरण कर बिजली बोर्ड निगम का पुनर्गठन करना होगा, जिसमे बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण एक साथ हों। प्रस्ताव पारित-फेडरेशन ने यह भी प्रस्ताव पारित किया है कि ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित करने और पुरानी पेंशन बहाली का वायदा भी सभी राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्र में करे, जिससे समय रहते देश के 25 लाख बिजलीकर्मी और उनके परिवार यह निर्णय ले सकें कि वे आगामी लोकसभा चुनाव में उन्हें वोट दें या न दें। कई राज्यों के प्रतिनिधि हुए शामिल बैठक में गुजरात, केरल, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मप्र, छत्तीसगढ, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, बिहार, झारखंड, ओडिशा, असम सहित 22 राज्योें के बिजली इंजीनियर प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दूबे, सेक्रेटरी जनरल रत्नाकर राव, मुख्य संरक्षक पद्मजीत सिंह, संरक्षक अशोक राव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील जगताप, बीआर मिश्र, उपाध्यक्ष के मिश्र, सेक्रेटरी राजीव सिंह, बीएल यादव, पवन जैन, प्रशांत चतुर्वेदी, वीकेएस परिहार, एल रवि, एएन जयराज, श्रीनिवासलू, जार्ज मैथ्यू, वाईएस परमार, पीरजादा हिदायतुल्ला, केडी बंसल, प्रीतम कीरो, सचिव लीगल अशोक कुमार जैन सहित कई प्रमुख पदाधिकारी बैठक मे सम्मिलित हुए। हिन्दुस्थान समाचार/दीपक/
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