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पालमू संसदीय क्षेत्र का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है, कांग्रेस भाजपा ने यहां पर फहराया है अपना परचम

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 5 2019 12:12PM
पालमू संसदीय क्षेत्र का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है, कांग्रेस भाजपा ने यहां पर फहराया है अपना परचम
मेदिनीनगर, 5 अप्रैल (हि.स.)। पलामू लोकसभा चुनाव में मुख्यतः सभी राजनीतिक पार्टियों ने चहलकदमी शुरू कर दी है। विधान सभा के मद्देनजर प्रमुख पार्टियां कोई कोर कसर छोड़ना नहीं चाह रही। उसका कारण है कि उनकी नज़र छह विधानसभा पर टिकी हुई हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए 29 अप्रैल को यहाँ पर मतदान होना है। 15 अप्रैल से राजनीति पार्टियों द्वारा सारी शक्तियां लगा दी जाएंगी। बहरहाल, भाजपा ने पुनः दूसरी बार विष्णू दयाल राम को पलामू उतारा है वहीं महागठबंधन के राजद प्रत्याशी घुरन राम को उम्मीदवार बनाया है। सीपीआई एमएल ने सुषमा मेहता को व बसपा ने पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां को अपना उम्मीदवार बनाया है। बताते चलें कि पलामू लोकसभा सीट पर 1951 व 1957 का चुनाव कांग्रेस के गजेंद्र प्रसाद सिन्हा ने जीत दर्ज की थी। 1962 में स्वतंत्र पार्टी के शशांक मंजरी ने जीत हासिल की।1967 और 1971 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर कमला कुमार जीती।. 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर रामदेनी राम ने जीत दर्ज की। इसके बाद फिर 1980 और 1984 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर कमला कुमारी जीतीं।1989 में जनता दल के टिकट पर जोरावर राम जीते।1991 में भाजपा के टिकट पर रामदेव राम ने जीत दर्ज की।1996, 1998 और 1999 के चुनाव में भाजपा के ब्रजमोहन राम जीत कर अपना परचम लहराया. 2004 में इस सीट राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर मनोज कुमार और 2006 के उपचुनाव में उसके ही टिकट पर घुरान राम जीते। 2009 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के कामेश्वर बैठा संसद पहुंचे। 2014 में भाजपा ने पूर्व डीजीपी विष्णू दयाल राम को चुनावी मैदान में उतारा और वे पहली बार सांसद बनकर संसद पहुंचे। इस क्षेत्र में यह गौर करने वाली बात है कि पलामू लोकसभा क्षेत्र में शुरुवाती काल मेंं कांग्रेस ने लगातार अपने को स्थापित किया था। 6 बार कांग्रेस जीत दर्ज की। उसके बाद कांग्रेस के गढ़ में 1991 में यहां भाजपा ने अपनी पहली दस्तख़त दी उसके बाद 5 बार यहां से भाजपा प्रत्याशी जीत कर संसद पहुंचे। राजद ने भी वर्ष 2004 में अपनी जीत दर्ज की। लेकिन 2008 के टर्म पूरा होने के पूर्व ही 2006 में उपचुनाव हुआ जिसमें राजद के घुरान राम ने जीत दर्ज की। जेएमएम ने 2009 में इस संसदीय क्षेत्र के अपना खाता पहली बार खोला। पलामू लोकसभा क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र रहा है, जहां पर एक ही प्रत्यासी एक से अधिक बार जीते हैं। दुबारा उन्हें संसद बनने का अवसर प्राप्त हुआ है। आंकड़ों पर नज़र डालें तो पलामू लोकसभा सीट से अब तक 18 सांसद संसद में जा चुके हैं। 1952 में फर्स्ट पास्ट दी पास्ट इलेक्शन पद्धति से चुनाव हुआ था, जिसमें पलामू लोकसभा सीट से दो सांसद राजेंद्र प्रसाद सिन्हा व जेठन सिंह खरवार सांसद का चुनाव जीते थे.ल।पलामू लोकसभा सीट से सबसे अधिक चार बार कांग्रेस की कमला कुमारी सांसद रही हैं। वो 1967, 1971, 1980 और 1984 में पलामू की सांसद बनीं। कमला कुमारी का रिकॉर्ड अभी तक टूटा नहीं है। इस संसदीय क्षेत्र से यह भी दिलचस्प है कि पलामू झारखंड का एक महत्वपूर्ण संसदीय क्षेत्र के रूप में विख्यात रहा है। इस क्षेत्र को 1967 में इसे अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व किया गया था. पलामू जिला 1892 में अस्तित्व में आया। जिले का मुख्यालय मेदिनीनगर है, जहां से सभी राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपनी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए एक्शन प्लान तैयार की जाती है। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/ वंदना/विनय
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