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जीवनशैली में सुधारकर रह सकते हैं स्वस्थ : अशोक वार्ष्णेय

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 3 2019 8:05PM
जीवनशैली में सुधारकर रह सकते हैं स्वस्थ : अशोक वार्ष्णेय
रांची, 03 अप्रैल (हि.स.) । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अनुषांगिक इकाई आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ अशोक कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली के आधार पर स्वास्थ्य संबंधी सभी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। हमें अपनी जीवनशैली के प्रति सजग, सावधान और संकल्पबद्ध होना होगा। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन की पद्धति भारत ने दुनिया को दी है। स्वस्थ आहार और विचार के द्वारा ही स्वस्थ भारत के सपने को साकार किया जा सकता है। वार्ष्णेय बुधवार को शांति उपेन्द्र फाउंडेशन फॉर डेवलपमेंट इनिशिएटिव के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। कार्यक्रम का विषय भारतीय परम्परा में स्वास्थ्य, समाज और बाजार था। उन्होंने कहा कि जागरूकर होकर जीवनशैली में सुधारकर हर प्रकार के रोगों से मुक्ति पा सकते हैं। आज प्रोफेसनलिज्म हावी है। प्रकृति प्रदत्त चीजों का प्रयोग कर दवा और डॉक्टर को दूर रख सकते हैं। समाज एक दूसरे का पूरक है। समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने की जरूरत है। नई पीढी को भारतीय परंपरा को तर्क की दृष्टि से समझाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज लोग अपनी आय का करीब 60 फीसदी खर्च स्वास्थ्य पर कर रहे हैं। हर व्यक्ति अपना जीवनशैली सुधार कर इस खर्च को रोक सकता है। आज शिक्षा, चिकित्सा और प्रवचन का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आज बच्चे को बचपन से बताया जाता है कि उसे स्कूल में टॉप करना है। प्रतियोगता कम प्रतिसपद्धा का युग हो गया है। बच्चा माता-पिता के आकांक्षा के बोझ तले दबता जा रहा है। इसका नतीजा समय से पूर्व बच्चे मौत को गले लगा रहे हैं। आत्महत्या भी पढे- लिखे, संपन्न लोग ज्यादा कर रहे हैं इसका कारण सिर्फ डिपरेशन है, जिसकी जडे आज लगातार चौडी होती जा रही है। उन्होंने कहा कि आज व्यक्ति अपने व्यक्तिगत कामों में इतना उलझा रहता है कि सही जीवनशैली को भूलता जा रहा है। इसलिए ऐसे लोग जिन्हें माया मिलती हैं उन्हें काया नहीं। मनुष्य अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकर रहे। अधिकाशं बीमारियां स्वत: ही ठीक हो जायेगी। दवा सहायक हो सकता है लेकिन स्थायी समाधान नहीं। उन्होंने कहा कि हम रोजमर्रा के जीवन में छोटी-छोटी चीजें करते हैं उसे हम स्वास्थ्य से जोडकर देखे तो काफी लाभप्रद साबित होगा। झारखंड में मिलने वाले पलाश के फूल के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि इस फूल का प्रयोग सिर्फ रंग बनाने में नहीं बल्कि चर्म रोग में भी काफी लाभदायक होता है। उन्होंने कहा कि आज स्ट्रेस का सबसे बडा कारण संयुक्त परिवार व्यवस्था का धीरे-धीरे खत्म होना है। संयुक्त परिवार व्यवस्था के कारण कई समस्याएं अपने आप खत्म हो जाया करती थी। संवादहीनता नहीं होता था। आज सोशल मीडिया के प्रयोग का प्रचलन काफी बढ गया है, लेकिन व्यक्ति उतना ही अनसोशल होता जा रहा है। व्यक्तिगत स्वार्थ हावी होता जा रहा है। लोकतंत्र में समाज की भूमिका सशक्त मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्याय के राजनीति शास्त्र विभाग के प्रोफेसर पवन कुमार शर्मा ने भारतीय परंपरा पर बल देते हुए कहा कि लोकतंत्र में समाज की भूमिका सशक्त होती हैं। जब लोग अपने कर्तव्य से विमुख हो जाते हैं, तो राज्य की शक्तियां हावी हो जाती है। लोकतंत्र में लोग शाक्तिशाली होते हैं। लेकिन जब राज्य शक्तिशाली हो जाता है, तो समाज कमजोर हो जाता है। इसलिए लोकतंत्र राज्य नहीं समाज आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज समाज में बाजारबाद हावी हो गया है। लोग सिर्फ अपने मुनाफे की बात सोचते हैं। यही कारण है कि देश में तमाम तरह की बीमारियां बढती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की दवाएं 15 दिन में एक्सपायर हो जाता था लेकिन कंपनियां अपने फायदे के लिए षडयंत्र के तहत इसके एक्सपाइयरी डेट बढा दे रही हैं। क्या है एसयूएफडीआई शांति उपेन्द्र फाउंडेशन फॉर डेवलपमेंट इनिशिएटिव (एसयूएफडीआई) का मुख्य उद्देश्य समाज में ज्ञान, शिक्षा, शोध एवं प्रशिक्षण का प्रचार एवं प्रसार है। यह संस्था प्रतिवर्ष जरूरतमंद बच्चों को छात्रवृति, अनुदान के अलावा पुस्तक, किताबों एवं कापियों का वितरण एवं कोचिंग क्लासेस की व्यवस्था करना है। साथ ही अनाथ बच्चों की देखभाल करना है। इस संस्था का मुख्य कार्यक्रम प्रतिवर्ष तीन बच्चियों को चिन्हित कर उनके देखरेख की व्यवस्था तथा उनकी पढाई से लेकर छात्रावास के खर्च का वहन भी करना है। कार्यक्रम में मुख्य रूप से आरएसएस के प्रांत प्रचारक रवि कुमार, जेपीएससी के सदस्य अजय चटराज सहित अन्य उपस्थित थे। हिन्दुस्थान समाचार/ वंदना/महेश/विनय
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