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झारखंड के शहरों में नन रेवेन्यू वाटर को कम करने पर जोर

By HindusthanSamachar | Publish Date: Jan 21 2019 7:29PM
झारखंड के शहरों में नन रेवेन्यू वाटर को कम करने पर जोर
रांची, 21 जनवरी (हि.स.)।स्टेट अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी (सुडा), ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल सेल्फ गवर्मेंट (एआईआईएलएसजी) एंड सेंटर फॉर इन्वरमेंटल प्लानिंग एंड टेक्नॉलॉजी (सीईपीटी) विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में राज्य सचिवालय स्थित सभागार में सोमवार को कार्यशाला आयोजित हुआ। जिसमें प्रदेश के नगर निकायों के वाटर ऑडिट पर चर्चा हुयी। विशेषज्ञों ने शहरों में होने वाले जलापूर्ति, उसके सदुपयोग, उठाव व आपूर्ति के अनुपात, सप्लाई से आने वाले राजस्व सहित अन्य पहलुओं के अडिट पर जोर दिया। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए सुडा के निदेशक अमित कुमार ने बताया कि राज्य सरकार के नगर विकास विभाग ने ओडीएफ, स्वच्छ भारत मीशन व सैनिटेशन के क्षेत्र में काफी प्रयास किए हैं और इसका बेहतर नतीजा भी देखने को मिला है। राज्य में एनर्जी का भी अडिट हो चुका है। अब हमें जल संरक्षण को देखते हुए जलापूर्ति की भी अडिट की जरुरत है। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल सेल्फ गवर्मेंट के तक्नीकि विशेषज्ञ राजीव कुमार ने बताया कि किस तरीके से महाराष्ट्र के नागपुर में वाटर अडिट के बाद जलापूर्ति किए जानेवाले पानी का शत प्रतिशत इस्तेमाल होता है। उन्होंने यह भी बताया कि सप्लाई लिकेज, इलीगल कनेक्शन के साथ साथ पानी के उठाव के अनुपात में कितना प्रतिशत पानी जनता के पास पहुंचता है। इसका व्यौरा अडिट से ही मिलेगा और इसके साथ साथ वाटर मीटर भी अनिवार्य होना चाहिए। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि शत प्रतिशत पानी कनेक्शनधारी नागरिकों के घर तक पहुंचेगा, तो राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। पानी वैसे भी बहुमुल्य है तो उसका सदुपयोग होना चाहिए। विशेषज्ञों ने ये भी कहा कि झारखंड के शहरों भी नन रेवेन्यू वाटर की मात्रा ज्यादा है इसे कम करने की जरुरत है। कार्य़शाला में सुडा के अधिकारियों के अलावा कई विशेषज्ञ शामिल थे। हिन्दुस्थान समाचार/कृष्ण/महेश
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