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पेट्रोटेक 2019: समाज के सामाजिक-आर्थिक विकास में ऊर्जा प्रमुख कारक: पीएम मोदी

By HindusthanSamachar | Publish Date: Feb 11 2019 5:02PM
पेट्रोटेक 2019: समाज के सामाजिक-आर्थिक विकास में ऊर्जा प्रमुख कारक: पीएम मोदी
नई दिल्ली, 11 फरवरी (हि.स.)। कई दशकों के सार्वजनिक जीवन ने मुझे आश्वस्त किया है कि ऊर्जा सामाजिक-आर्थिक विकास का एक प्रमुख चालक है। अर्थव्यवस्था की तीव्र वृद्धि के लिए उपयुक्त मूल्य, स्थिर और स्थाई ऊर्जा आपूर्ति आवश्यक है। यह समाज के गरीब और वंचित वर्गों को आर्थिक लाभ का हिस्सा बनाने में भी मदद करता है। वृहद स्तर पर, ऊर्जा क्षेत्र विकास की धुरी और महत्वपूर्ण प्रवर्तक है। जैसा कि हम वैश्विक ऊर्जा के वर्तमान और भविष्य पर चर्चा करने के लिए यहां इकट्ठा होते हैं, परिवर्तन की हवाएं वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में स्पष्ट हैं। ऊर्जा आपूर्ति, ऊर्जा स्रोत और ऊर्जा खपत पैटर्न बदल रहे हैं। शायद, यह एक ऐतिहासिक परिवर्तन हो सकता है। ये बातें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली से लगे ग्रेटर नोयडा में शुरू हुए पेट्रोटेक-2019 के उद्घाटन सत्र में कहीं। पेट्रोटेक-2019 का उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में पश्चिम से पूर्व तक ऊर्जा की खपत में बदलाव आया है। संयुक्त राज्य अमेरिका शेल क्रांति के बाद दुनिया का सबसे बड़ा तेल और गैस उत्पादक बन गया है। सौर ऊर्जा और ऊर्जा के अन्य नवीकरणीय स्रोत अधिक प्रतिस्पर्धी बन गए हैं। वे पारंपरिक ऊर्जा रूपों के लिए स्थायी विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। प्राकृतिक गैस तेजी से वैश्विक ऊर्जा मिश्रण में सबसे बड़ा ईंधन बन रहा है। सस्ती नवीकरणीय ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और डिजिटल अनुप्रयोगों के बीच अभिसरण के संकेत हैं। इससे कई सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में तेजी आ सकती है। वहीं जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए राष्ट्र एक साथ आ रहे हैं। भारत और फ्रांस द्वारा प्रवर्तित अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसे वैश्विक साझेदारी में यह दिखाई देता है। हम अधिक ऊर्जा उपलब्धता के युग में प्रवेश कर रहे हैं लेकिन दुनियाभर में एक अरब से अधिक लोगों के पास अब भी बिजली की सुविधा नहीं है। कइयों के पास खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन नहीं है। भारत ने ऊर्जा पहुंच के इन मुद्दों को संबोधित करने का बीड़ा उठाया है। हमारी सफलता में, मैं दुनिया के लिए आशा करता हूं कि ऊर्जा उपलब्धता की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। लोगों को ऊर्जा की स्वच्छ, सस्ती, टिकाऊ और समान आपूर्ति के लिए सार्वभौमिक पहुंच होनी चाहिए। ऊर्जा न्याय पर आधारित युग की शुरुआत में भारत का योगदान महत्वपूर्ण है। वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारत की भूमिका पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि वर्तमान में, भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। आईएमएफ और विश्व बैंक जैसी अग्रणी एजेंसियां भी भारत को लेकर ​​आने वाले वर्षों में यही अनुमान लगा रहीं हैं। अनिश्चित वैश्विक आर्थिक माहौल में, भारत ने विश्व अर्थव्यवस्था ने तूफानी समुद्र में जहाज के लंगर के रूप में स्थिरता का एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। भारत हाल ही में दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत दूसरी सबसे बड़ी विश्व अर्थव्यवस्था बन सकता है। हम दुनिया के तीसरे सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता भी हैं, जिनकी मांग सालाना पांच प्रतिशत से अधिक है। भारत 2040 तक दोगुनी से अधिक की उम्मीद के साथ ऊर्जा कंपनियों के लिए एक आकर्षक बाजार बना हुआ है। हमने ऊर्जा नियोजन के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया है। दिसंबर 2016 में पिछले पेट्रोटेक सम्मेलन के दौरान, मैंने भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए चार स्तंभों का उल्लेख किया। ये ऊर्जा पहुंच, ऊर्जा दक्षता, ऊर्जा स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा हैं। ऊर्जा न्याय मेरे लिए भी एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है और भारत के लिए एक सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस ओर, हमने कई नीतियों को विकसित और कार्यान्वित किया है। इन प्रयासों के परिणाम अब स्पष्ट हैं। हमारे सभी ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली पहुंच गई है। इस वर्ष हम भारत में सौभाग्य नामक एक लक्षित कार्यक्रम के माध्यम से भारत में परिवारों के सौ प्रतिशत विद्युतीकरण को प्राप्त करने का लक्ष्य रखते हैं। हमारा उद्देश्य ट्रांसमिशन और वितरण में नुकसान को कम करना भी है। भारत की विश्व बैंक की बिजली रैंकिंग में सुधार आया है, जो 2014 में एक सौ ग्यारह से बढ़कर 2018 में इक्कीस हो गई है। उजाला योजना के तहत देशभर में वितरित एलईडी बल्बों के परिणामस्वरूप, सत्रह हजार करोड़ रुपये की वार्षिक बचत हुई है। स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन तक पहुंच से महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से लाभ मिलता है। उज्ज्वला योजना के तहत केवल तीन वर्षों में 6.4 करोड़ परिवारों को एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं। ''ब्लू फ्लेम रिवॉल्यूशन'' पर काम चल रहा है। पांच साल पहले पचपन प्रतिशत से एलपीजी कवरेज नब्बे प्रतिशत से अधिक हो गया है। स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिल रहा है। सौ प्रतिशत विद्युतीकरण और बढ़े हुए एलपीजी कवरेज जैसी उपलब्धियां लोगों की भागीदारी से ही संभव हैं। ऊर्जा न्याय तभी हो सकता है जब लोग अपनी सामूहिक शक्ति पर विश्वास करें। हिन्दुस्थान समाचार/निमिष/आकाश
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