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मॉर्गन स्टैनली ने चेताया, नए एफडीआई नियमों के कारण फ्लिपकार्ट से किनारा कर सकता है वॉलमार्ट

By HindusthanSamachar | Publish Date: Feb 6 2019 5:57PM
मॉर्गन स्टैनली ने चेताया, नए एफडीआई नियमों के कारण फ्लिपकार्ट से किनारा कर सकता है वॉलमार्ट

प्रजेश शंकर

नई दिल्‍ली, 06 फरवरी (हि.स.)। रिटेल दिग्गज वालमार्ट फ्लिपकार्ट से बाहर निकल सकती है। दरअसल, ऐसी संभावना ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए भारत के नए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों के लागू होने के बाद दिख रही है।

यह बात अमेरिका की बड़ी इन्वेस्‍टमेंट बैंक और फाइनेंशियल सर्विस प्रदाता कंपनी मॉर्गन स्टैनली ने देते हुए कही है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि वॉलमार्ट ठीक उसी तरह फ्लिपकार्ट से बाहर आ सकता है, जिस तरह से एमेजॉन ने चीन के बिजनेस के साथ किया था। ऐसा उस हालत में ही संभव हो सकता है, जब रिटेल दिग्‍गज को लगेगा कि उसे लंबी अवधि में प्रॉफिट की संभावना कम है।

नया एफडीआई नियम 01 फरवरी से है लागू

ब्रोकरेज फर्म की ओर से इसी हफ्ते में जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय ई-कॉमर्स बाजार के और अधिक जटिल होने के बाद यह निकासी संभव है लेकिन यह पूरी तरह से होगा बड़ा सवाल है। यह रिपोर्ट भारत के ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए जारी नए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों के मद्देनजर आई है, जिन्हें सरकार की ओर से 1 फरवरी को लागू किया जा चुका है।

फ्लिपकार्ट को 25 फीसदी प्रोडक्‍ट्स हटाना जरूरी

मॉर्गन स्टैनली ने कहा कि नए नियमों के चलते फ्लिपकार्ट को अपने प्लेटफॉर्म से 25 फीसदी उत्पादों को हटाने की जरूरत है। कंपनी ने कहा कि इन नए नियमों का सबसे बड़ा असर स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों पर होगा, क्योंकि सप्लाई चेन और अभी मौजूदा एक्सक्लूसिव डील को लेकर कई अहम बदलाव किए गए हैं।

रेवेन्यू का 50 फीसदी इलेक्‍ट्रॉनिक प्रोडक्‍ट्स से

रिपोर्ट में कहा गया है कि 'हमारा अनुमान है कि फ्लिपकार्ट के रेवेन्यू का करीब 50 फीसदी हिस्सा इसी श्रेणी से आता है। इसका सीधा-सा मतलब यह हुआ कि फ्लिपकार्ट को निकट भविष्‍य में सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।' बता दें कि फ्लिपकार्ट पर सबसे ज्यादा बिक्री स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की होती है, जो कि ज्यादा कीमत के होते हैं।

ई-कॉमर्स के नए नियम से एक्‍सक्‍लूसिव सेल नहीं

गौरतलब है कि नए बदलावों के मुताबिक अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म उन कंपनियों के प्रॉडक्ट नहीं बेच पाएंगे, जिनमें उनकी हिस्सेदारी है। इसके अलावा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर किसी प्रॉडक्ट विशेष की एक्सक्लूसिव सेल भी नहीं होगी। ई-कॉमर्स कंपनियों ने नए नियम की डेडलाइन को आगे बढ़ाने के लिए सरकार से आग्रह भी किया था।

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