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बलूचारी साड़ियों को वैश्विक विपणन प्लेटफॉर्म मुहैया कराने में जुटी बंगाल सरकार

By HindusthanSamachar | Publish Date: Feb 20 2019 4:37PM
बलूचारी साड़ियों को वैश्विक विपणन प्लेटफॉर्म मुहैया कराने में जुटी बंगाल सरकार

ओम प्रकाश

कोलकाता, 20 फरवरी (हि.स.)। भारतीय संस्कृति की तमाम कलाकृतियों की छाप के साथ बंगाल में विशेष तौर पर बनाई जाने वाली पारंपरिक बलूचारी साड़ी को बंगाल सरकार ने वैश्विक विपणन हेतु प्लेटफॉर्म मुहैया कराने की शुरुआत की है। पश्चिम बंगाल राज्य हथकरघा विभाग की ओर से बुधवार को इस बारे में जानकारी दी गई है।

बताया गया है कि बलूचारी बंगाल की एक सर्वोत्कृष्ट रेशमी साड़ी है, जो बड़े पैमाने पर रंगे हुए रेशम का उपयोग करके बनाई गई है। इसमें जटिल कलाकृतियों के साथ भारतीय पौराणिक कथाओं को दर्शाया गया है। साड़ी के पल्लू पर पौराणिक कथाएं बुनी रहती हैं। मुर्शिदाबाद के बलूचार में सबसे पहले यह रेशम मिला था। उसके बाद बांकुड़ा जिले के विष्णुपुर के घर में भी इस रेशम से बने कपड़े मिले थे| उसके बाद यह साड़ियां इतिहास बनने की ओर आगे बढ़ चली थीं। लेकिन बंगाल सरकार के हथकरघा विभाग में इसे दोबारा विकसित कराना शुरू किया है और विपणन के लिए वैश्विक प्लेटफॉर्म मुहैया करा रही है।

बिष्णुपुर में भी, डिजाइन, हथकरघे, बुनाई तकनीक और धागे का उपयोग किया जाता है। बंगाल सरकार की बलूचारी परियोजना के शुभारंभ से राज्यभर में इसकी बिक्री में तेज वृद्धि हुई है। परियोजना, बलूचारी पश्चिम बंगाल राज्य हथकरघा बुनकर सहकारी समिति (तन्तुजा) और राज्य कपड़ा निदेशालय के बीच एक सहयोग है। इस परियोजना का उद्देश्य उपभोक्ताओं के वर्तमान रुझानों और मांगों को स्वीकार करते हुए पुराने और नए डिजाइनों को सम्मिश्रण करके बलूचारी वस्त्र को पुनर्जीवित करना है। यह नया दृष्टिकोण परियोजना की बड़ी सफलता के लिए मददगार है। परियोजना में रेशम की खेती में किसानों की मदद करना शामिल है। उल्लेखनीय है कि परियोजना की शुरुआत 2017 में कोलकाता के पार्क स्ट्रीट में एक विशेष शोरूम के उद्घाटन से की गई थी। स्टोर का नाम बलूचारी है।

शोरूम का वार्षिक कारोबार अब करोड़ों में है। पार्क स्ट्रीट स्टोर न केवल साड़ी, बल्कि उन पर बलूचारी पैटर्न वाले अन्य उत्पाद भी बेचता है| जैसे जूते, बैग, पर्स, बेल्ट, और रेशम के सामान भी। चमड़े के लेख में बालूचरी बुनाई के साथ रेशम के पैच होते हैं जो उन पर चिपक जाते हैं। बलूचारी साड़ियों की बिक्री तांतूजा आउटलेट्स के माध्यम से भी की जाती है, जो हैंडलूम वीवर्स सहकारी समिति का प्राथमिक ब्रांड है। तांतूजा के पूरे भारत में 83 बिक्री आउटलेट हैं। बिक्री का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफार्मों के माध्यम से भी होता है। बलूचारी बुनाई के लिए हथकरघा कपड़े सहकारी समितियों और कारीगरों से 12 खरीद केंद्रों और दो प्रशिक्षण-सह-उत्पादन केंद्रों के माध्यम से खरीदे जाते हैं।

रेशम की खेती के संबंध में, बलूचारी परियोजना का एक अन्य महत्वपूर्ण घटक, राज्य सरकार ने 59 सेरीकल्चर फार्म चलाए हैं जो बेहतर गुणवत्ता वाले बीजों की खेती करते हैं। फिर ये बीज किसानों को रियायती दर पर दिए जाते हैं, जिनसे कच्चे रेशम का उत्पादन होता हैं। किसान कच्चे रेशम को बुनकरों को बेचने से अच्छा राजस्व कमाते हैं।

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