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बेमौसम बारिश ने तोड़ी किसानों की कमर

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 17 2019 9:13PM
बेमौसम बारिश ने तोड़ी किसानों की कमर
रीवा, 17 अप्रैल (हि.स.)। जिले में एकबार फिर पिछले वर्ष की ही तरह मौसम ने किसानों के साथ बेरुखी की है। जहाँ अल्पवृष्टि से किसानों ने समय पर बुवाई नहीं की वहीं अब जब किसी प्रकार खून पसीने से सींचकर रबी की फसल काटने का समय आया तो बेमौसम बारिश ने तबाही मचा दी। बारिश के साथ ओले और आंधी ने और भी कमर तोड़ दी। गेहूं की फसल भींगने से अब कटाई एक सप्ताह और विलम्ब से होगी वहीं आंधी तूफान की वजह से काटी हुई फसलें उडक़र दूसरे खेतों में तितर बितर हो गईं जिन्हें समेटना किसानों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। कुल मिलाकर सरकार और प्रकृति दोनो ही किसानों को बर्बाद करने में पीछे नही हैं। बारिश से गहाई में होगी देरी बेमौसम बारिश से कई कार्य प्रभावित होंगे। एक तरफ जहां कटाई प्रभावित होगी वहीं गहाई और मिजाई भी प्रभावित होगी। अमूमन गहाई के लिए फसल का अच्छी तरह सूख जाना महत्वपूर्ण होता है। बिना अच्छे से सूखी फसल की गहाई मिजाई नही हो पाती क्योंकि फसल कडक़ नही रहती। गीले होने के कारण अनाज की बाली डंठल से अलग नही हो पाती साथ ही कटाई के दौरान भी गीली होने से कटाई में दिक्कत जाती है। अत: खामखा किसानों की गहाई मिजाई एकबार फिर हफ्तों लेट हो चुकी है जिससे उनके शादी अवसर नाते रिश्तेदारी के भी काम प्रभावित होंगे। ओले, बारिस आंधी से भारी नुकसान तेज आंधी, बारिस और साथ ही कुछ जगहों पर ओले से खड़ी फसल जिसमे से सरसों, अलसी, गेहूं आदि सम्मिलित हैं काफी नुकसान हुआ है। ऐसी स्थिति में किसानों ने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए मुआबजे की माग की है। मनगवां तहसील अन्तर्गत आने वाले राजस्व निरीक्षक मंडल गढ़ के पचासों ग्रामो में बारिस आंधी की वजह से फसलें तबाह हुई हैं। कैथा, सोरहवा, इटहा, अगडाल, अमिलिया, अकलसी, लौरी, गढ़, परासी, मिसिरा, पंडुआ सहित दजऱ्नों ग्रामों की फसलें प्रभावित हुई हैं। इसी प्रकार सिरमौर तहसील अन्तर्गत हिनौती हल्का सहित राजस्व निरीक्षक मंडल लालगांव में आने वाले दजऱ्नों ग्रामों हिनौती, बडोखर, मदरी, बांस, पनगड़ी, पताई, लालगांव, चौरी, लोटनी, कठमना, भदौहा, अमवा, शिसवा आदि ग्रामों में भी तेज आंधी और बारिस की वजह से फसलें नष्ट हुई हैं और यहां भी किसानों द्वारा सर्वे कर मुआबजे की माग की गई है। प्रकृति की बेरुखी पर क्या कह रहे अन्नदाता पहले बोवनी के समय तो बारिश नहीं हुई और ऊपर से किसी प्रकार पानी खरीदकर सिंचाई की गयी तो अब प्राकृतिक कहर ओले, आंधी और बारिश से नुकसान हुआ है। हम सरकार से सर्वे कर मुआबजे की माग करते हैं। -भैयालाल द्विवेदी, कृषक ग्राम कैथा, थाना गढ़ इस साल प्रकृति ने किसानो के साथ ज्यादती की है। बारिस कम होने से पहले बुवाई में लेटलतीफी हुई, अब जो भी खून पसीने से सींच सींच कर उगाया था वह भी प्रकृति बर्बाद कर रही है। सरकारों को किसानों से कुछ लेना देना नहीं है। ऐसे में किसानों के पास आत्महत्या ही विकल्प बचता है -धीरेंद्र सिंह परिहार, दिव्यांग किसान, ग्राम बडोखर, ब्लॉक गंगेव किसान की कमर टूट चुकी है। किसान के पास कोई विकल्प नही बचा है। किसान बस कलेजे में पत्थर रखकर काम कर रहा है। किसानी अब सबसे बड़े घाटे का सौदा है। और ऐसा सौदा जिसमें हर किसान को पता है कि घाटा सुनिश्चित है फिर भी पूर्वजों की जमीन होने के नाते बुवाई बिना भी नहीं रहा जाता। इस खेती से खाने तक के लिए नहीं मिल रहा, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्च तो दूर की बात है। -बीरेंद्र लोनिया, किसान ग्राम करहिया, ब्लॉक त्योंथर हमने ज्यादातर गेहूं और सरसों बोई थी, लेकिन इस बारिस आंधी और बीच मे पड़े ओलों के कारण बहुत प्रभावित हुई है। एक तरफ तो आवारा मवेशियों से किसान परेशान हैं और ऊपर से प्राकृतिक प्रकोप, ऐसे में किसानों के पास कोई विकल्प नहीं बचता। सरकारें किसानों के नाम पर मात्र राजनीति कर रही हैं। -कमलेश पांडेय, किसान ग्राम पंचायत सेदहा, तहसील सिरमौर हिन्‍दुस्‍थान समाचार /विनोद /राजू/मुकेश
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