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एसएससी छात्र से ऑनलाइन ठगी करने वाले तीन गिरफ्तार

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 17 2019 8:42PM
एसएससी छात्र से ऑनलाइन ठगी करने वाले तीन गिरफ्तार
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर पश्चिमी जिले के मुखर्जी नगर इलाके में एक सिविल सेवाओं (एसएससी) की पढ़ाई कर रहे छात्र से पौने पांच लाख रुपये से ज्यादा की ऑन लाईन ठगी हुई। उत्तर पश्चिमी जिले की साइबर सेल की टीम ने वारदात को अंजाम देने वाले तीन शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान विश्वजीत सिंह, विकास कुमार और सन्नी शंकर के रूप में हुई है। आरोपितों के कब्जे से चार मोबाइल फोन, चार सिमकार्ड एवं फर्जी सामान व दस्तावेज जब्त किये हैं। डीसीपी विजिंता आर्या के अनुसार नौ अप्रैल को मुखर्जी नगर थाने में अजमेर राजस्थान के रहने वाले पीड़ित करन सिंह ने शिकायत देकर बताया कि वह मुखर्जी नगर में किराये के घर में रहकर यहां से वह एसएससी की पढ़ाई कर रहा है। बीते जनवरी महीने में उसे कहीं से पता चला था। सरकार की ई गर्वनेस के तहत ग्राहक सेवा केन्द्र योजना है, जो स्टार्टअप के लिए काफी लाभदायक है। जिसके बाद 10 जनवरी को वेबसाइड सीएसपी बैंक मितरा डाट इन पर लॉग इन किया। जिसमें एक फार्म अप्लाई करने का ऑपशन आया। उस फार्म को भरकर भेज दिया था। दूसरे ही दिन अंजान नंबर से उसे कॉल आया। कॉलर ने खुद को प्रमोद कुमार बताया। उसने खुद को सीएसपी बैंक का अधिकारी बताया। उसने बताया कि आपने एक फार्म अपलोड किया है। उसी बारे में आपसे बात करना चाहता है। कॉलर ने बताया कि अगर आप ब्रांच लेना चाहते हैं, तो आपको सबसे पहले 15 हजार छह सौ रुपये सिक्योरिटी मनी जमा करनी होगी। यह सिक्योरिटी पांच साल के लिए होगी। इसके बदले कंपनी से आपको वेब कैमरा,फोन,प्रिंटर आदि मिलेगा। 75 सौ रुपये तनख्वाह और 22 सौ रुपये ऑफिस का किराया मिलेगा। इसके साथ इंटरनेट सेवा,बिजली का बिल व अन्य सुविधा हेतु किराया मिलेगा। विश्वास होने पर कंपनी के खाते में 78 सौ रुपये डाल दिये। कंपनी ने बाद में एक बैंक खाता उसका खोला। अगले ही दिन कंपनी में व्हटसअप पर एक एग्रिमेंट पेपर और एक फार्म भेजा। कॉलर ने बताया कि फार्म भरकर कंपनी की ई मेल आईडी पर भेज दो। फार्म को ई मेल पर भेज दिया। बाद में जब फार्म को पढ़ा तो उसमें जमा कराने की रकम डेढ़ लाख रुपये लिखी थी। प्रमोद से संपर्क करने पर इस रकम के बारे में पूछा गया, तो प्रमोद ने उसे रकम वापिस होने की बात कही। उसकी बातों में आकर पचास हजार रुपये और जमा करा दिये। इस तरह से प्रमोद के झांसे में आकर कई बार कंपनी के नामक पर चार लाख रुपये ज्यादा जमा करा दिये। बाद में शक होने पर जब वेबसाइड पर दिये कलकत्ता पते पर गया। वहां पर ऐसा कोई ऑफिस नहीं मिला। आसपास के लोगों ने बताया कि करीब दो साल पहले ऑफिस बंद करके चले गए हैं। जब प्रमोद के एक अन्य साथी श्रीकांत को फोन पर संपर्क कर पैसे वापिस मांगे, तो श्रीकांत ने कहा ये राजस्थान नहीं बंगाल है। यहां पर जान से मार दिया जाता है। चुपचाप अपने घर चले जाओं। पीड़ित करन ने पुलिस को बताया कि गैंग इस तरह से ऑनलाईन ठगी कर सैकेंड़ों लोगों को बेवकूफ बनाकर करोड़ों रुपये ठग चुके हैं। पुलिस ने केस दर्ज किया। साइबर सेल के इंस्पेक्टर नरेश चन्द्र की देखरेख में जांच टीम ने शिकायतकर्ता से कॉलर के सभी फोन नंबर लिये। जिनको खंगालने पर दो फोन नंबर पकड़े गए तीन में से दो आरोपितों के पता मिला। जिनकी आईडी बिहार की थी। जबकि एक फर्जी आईडी पर फोन नंबर लिया गया था। जिनके फोन वारदात के बाद से स्वीच ऑफ थे। वेबसाइड के बारे में पता लगा कि वेबसाइड भी फर्जी तरीके से आरोपितों ने बना रखी थी। तीनों आरोपितों को उनके फोन सर्विलांस पर लगाने के बाद उनकी लोकेशन पता लगने पर गिरफ्तार कर लिया। आरोपितों से पूछताछ करने पर पता चला कि विश्वजीत कई बैंकों के खाताधारियों की पूरी जानकारी व उनके मोबाइल फोन नंबर आदि की जानकारी सन्नी को बेचता है। सन्नी उनके पैसे ट्रांस्फर करने में सहायता करता है। यह जानकारी विकास कमीशन पर काम कर पैसे ट्रांस्फर करता है। इस पूरी वारदात के पीछे सन्नी का दोस्त बिहार में रहने वाला नवादा है। जिसको पकड़ने के लिए जांच टीम बिहार में छापेमारी कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बैंक और मोबाइल फोन नंबर किससे और कितने में लिया करते थे। वह अभी तक कितने लोगों के साथ ठगी की वारदात कर चुके हैं। जांच टीम आरोपितों से झारखंड का एंगल भी पूछने की कोशिश कर रही है। हिन्दुस्थान समाचार/अश्वनी शर्मा
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