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लुप्त होती गौरैया से मनुष्य के अस्तित्व पर भी संकट

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 17 2019 8:16PM
लुप्त होती गौरैया से मनुष्य के अस्तित्व पर भी संकट
हरिद्वार, 17 अप्रैल (हि.स.)। घरों के आसपास रहने वाली गौरैया दिन प्रतिदिन कम होती दिख रही हैं। इस छोटे से खूबसूरत पक्षी का कभी इंसान के घरों में बसेरा हुआ करता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। गौरैया के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कहीं-कहीं तो अब ये बिल्कुल भी दिखाई नहीं देती। इसका जिम्मेदार मनुष्य ही है। पक्षियों के विलुप्त होने से मनुष्य के अस्तित्व को भी खतरा हो सकता है। बुधवार को पक्षी विशेषज्ञ प्रो. दिनेश भट्ट ने बताया कि गौरेया हमारे परिवेश से दूर होती जा रही है। औद्योगिकरण, शहरीकरण एवं कृषि विकास से जो पारिस्थितिकी तंत्र में असर पड़ा है, उसके चलते पर्यावरण में असंतुलन पैदा हो गया है। दूसरी तरफ कृषि में उपयोग होने वाले कीटनाशकों से भी पक्षियों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। इससे पक्षियों के मृत्यु दर में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है। अधिकांश पक्षी कीटभक्षी भी होते हैं। ऐसे में वह केवल कीड़े-मकोड़े खाकर ही जीवित रहते हैं। क्योंकि अनाज के मुकाबले कीटों में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है। पक्षियों को जिंदा रहने के लिए प्रोटीन की जरूरत पड़ती है, लेकिन कृषि में प्रयोग होने वाले केमिकल और कीटनाशकों की वजह से कीटों से माध्यम से जहर पक्षियों तक पहुंच रहा है। लिहाजा पक्षियों की मृत्युदर बढ़ती जा रही है। ऐसा नहीं है कि पक्षियों के कम होने से मनुष्य पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा। पक्षियों के विलुप्त होने से कहीं ना कहीं मनुष्य के अस्तित्व पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा हो जाएगा। हम पर्यावरण को लेकर गंभीर नहीं है। आवश्यकता है कि पर्यावरण के प्रति सभी अपनी जिम्मेदारियों को समझें और पक्षियों के संरक्षण में कोई सार्थक कदम उठाएं। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत/अमर/अभिषेक
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