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आंधी-तूफान और बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 17 2019 7:35PM
आंधी-तूफान और बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि
गुना, 17 अप्रैल (हि.स.)। मौसम के बिगड़े मिजाज के बीच लगातार दो दिन से रुक-रुककर हो रही बूदांबांदी एवं आंधी-तूफान के बीच बुधवार सुबह धुआंधार बारिश के साथ जमकर ओलावृिष्ट हुई। बारिश इतनी तेज थी कि थोड़ी दूर का ही दिखाई नहीं दे रहा तो ओलों का शोर वातावरण में गूंज रहा था। मौसम का यह रूप पूरे जिले में देखने को मिला। इस दौरान चने बराबर ओलों के साथ अमरुद और आलू के आकार के भी ओले गिरे। इस ओले, बारिश से जहां प्रकृति का सौन्दर्य उभरकर सामने आया तो तबाही की कहानी भी लिखी गई। इस ओले, बारिश के चलते खुले में रखा हजारों क्विंटल गेहूँ बर्बाद हो गया। इस तबाही से अन्नदाता किसान चित्कार कर उठा। किसान का कहना रहा कि ओले तो उनकी किस्मत पर पडक़र रह गए हैं। पूरे जिले में देखने को मिला एक सा दृश्य ओले, बारिश के दौरान पूरे जिले में एक सा दृश्य देखने को मिला। शहर के साथ ही आरोन, बजरंगगढ़, कुंभराज, चांचौड़ा, बीनागंज, रुठियाई, राघौगढ़, बमौरी, धरनावदा, मधुसूदनगढ़ में धुआंधार बारिश के साथ ओले गिरे है। मौसम यूं तो पिछले दो दिन से बिगड़ा हुआ था और तेज आंधी के साथ रुक-रुककर बूदांबांदी और बारिश हो रही थी। मंगलवार को भी सुबह बूदांबांदी तो शाम को बारिश हुई। इसके बाद बुधवार सुबह अचानक जोरदार बारिश शुरु हो गई। बारिश इतनी तेज थी कि थोड़ी ही दूर का दिखाई नहीं दे रहा था, वहीं इसी के साथ ओले गिरने शुरु हो गए। ओलों की मार इतनी तेज थी कि कूलर, पंखों में घरों में सो रहे लोग बिस्तर से निकल बाहर आ गए। इस दौरान सडक़ पर बर्फ की सफेद चादर बिछ गई थी। जिले में कई स्थानों पर चने के बराबर तो अनेक स्थानों पर आलू और अमरुद के आकर के भी ओले गिरे। कुछ स्थानों पर इससे भी बड़े ओले गिरने के समाचार है। कहीं 15 तो कही 30 मिनट गिरे ओले ओले पानी की मार पूरे जिले में देखने को मिली। इस दौरान कहीं 15 मिनट तो कहीं 30 मिनट ओले गिरे। राघौगढ़ में 12 मिनट ओले गिरे तो बमौरी में 10 मिनट तक ओलों की बारिश हुई। इसी क्रम में राघौगढ़, रुठियाई और मधुसूदनगढ़ में करीब 30 मिनट तक ओले गिरे। धरनावदा में ओले नीबू के आकार के गिरे। यहां फसल को 20 प्रतिशत नुकसान बताया जा रहा है। आरोन शहर में तो ओले नहीं गिरे, किन्तु ग्रामीण क्षेत्र में ओलों की जबर्रदस्त बारिश हुई। यहां रात में भी पानी गिरा। तिरपाल, बरसाती लेकर दौड़ते रहे किसान ओले, बारिश से किसानों की मेहनत बर्बाद हुई है। खेतों में से फसल कटकर खलिहान में पहुंच चुकी है। इसके साथ ही ट्रेक्टर-ट्रॉली में भरकर किसान उसे बेचने मंडी में ले जा रहे है। ऐसे में ओले, पानी ने फसल को बर्बाद कर दिया। किसान तिरपाल, बरसाती लेकर अपनी मेहनत बचाने इधर से उधर दौड़ते रहे। किसान रामदयाल का कहना है कि बारिश में भींगने से जहां गेहूँ सड़ जाएगा तो धनिया की रंग उड़ गया है। इसके साथ ही बारिश से चने को भी नुकसान पहुंचा है। किसान बलवीर के मुताबिक जिन किसानों ने बाद में बोवनी की थी, उनकी बालें टूटकर गिर गई है, इसके साथ ही गेहूं की फसल खेत में आड़ी बिछ गई है। लापरवाही ने बर्बाद किया अन्न समर्थन मूल्य के कांटों पर अनाज बड़ी तादाद में बारिश से भींगकर बर्बाद हो गया। इसमें खास तौर से जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आई है। गौरतलब है कि मौसम का मिजाज पिछले करीब हफ्ते भर से बिगड़ा हुआ है। दो दिन से तो बूदांबांदी और बारिश भी हो रही है। इसके साथ ही गेहूं का परिवहन कर उसे सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का प्रयास नहीं किया गया। नतीजा जोरदार ओलावृष्टि और बारिश से खुले में रखा हजारों क्विंटल गेहूं बर्बाद हो गया। कई केन्द्रों पर इसे बरसाती और तिरपाल से बचाने की कोशिश की गई, किन्तु कई जगह कोई इंतजाम नहीं होने के चलते अनाज को पानी में मिलने देखने के सिवाए कोई चारा नहीं था। हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक / मुकेश
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