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20 लाख मतों में चार लाख से अधिक है मुस्लिम मतदाता

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 17 2019 7:04PM
20 लाख मतों में चार लाख से अधिक है मुस्लिम मतदाता
रेवाड़ी, 17 अप्रैल (हि.स)। गुरुग्राम लोकसभा सीट के जरिये देश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंचने का सपना संजोने वाले नेताओं की नजर मुस्लिम वोटर्स पर टिकी हुई है। ऐसा होना स्वभाविक भी है, क्योंकि इस सीट पर सबसे ज्यादा मतदाता मुस्लिम समुदाय के हैं। इनकी संख्या 20 प्रतिशत है अर्थात 4 लाख से ऊपर है। इधर राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करने के आरोप लगते रहे हैं, जबकि कांग्रेस, भाजपा पर मुस्लिमों को लेकर निशाना साधती रही है, ऐसे में मुसलमान वोटर्स का रूख इस सीट के उम्मीदवार का भाग्य विधाता बन सकता है। लंबे समय बाद 2009 में दोबारा से आस्तित्व में आई गुरुग्राम लोकसभा सीट पर जातीय समीकरण बहुत ज्यादा मायने रखता है। यहां सबसे ज्यादा वोटर्स मुस्लिम समुदाय के हैं। इनकी संख्या कुल मतों की 20 प्रतिशत है। गुरूग्राम सीट पर कुल 20 लाख 34 हजार मतदाता है। मुस्लिम वोटर्स के बाद मतों की संख्या में दूसरा नंबर अन्य वर्ग का आता है, जिनका मत प्रतिशत 19.3 है। तीसरा नंबर अहीर समुदाय आता है, जिनकी संख्या 17.5 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति-जनजाति के मतदाता भी अच्छी खासी संख्या में है, उनका मत प्रतिशत 13 है। बता दें कि गुरूग्राम सीट पर पंजाबियों की संख्या 7.6 प्रतिशत, जाटों की 7, ब्राह्मणों की 4.4, गुर्जर 4.2, राजपूत 4.2 तथा बनिया समाज के 2.8 प्रतिशत मतदाता है। गुरूग्राम सीट के आस्तित्व में आने के बाद का यह तीसरा चुनाव है और सभी में उम्मीदवारों अथवा दलों ने मुस्लिम मतदाताओं को साधने का प्रयास किया है। यह भी निर्विवाद सत्य है कि मुस्लिम मतदाता बंटते रहे हैं, लेकिन समाज के नाम पर एकजुटता का भी उन्होंने परिचय दिया है। इसका प्रमाण यह है कि वर्ष 2009 व 2014 के चुनाव हैं, जिनमें मुस्लिम उम्मीदवार जाकिर हुसैन अच्छे मत लेकर दूसरे स्थान पर रहे हैं। वर्ष 2014 के चुनाव में बतौर भाजपा उम्मीदवार राव इंद्रजीत सिंह ने 6 लाख 44 हजार मत लेकर जाकिर हुसैन को 2 लाख 74 मतों से हराया था। जाकिर हुसैन ने पौने चार लाख मत लिए थे, जबकि उस समय मुसलमानों की वोट इस सीट पर करीब पौने चार ही लाख थी। हालांकि यह सही है कि जाकिर हुसैन को मिले सभी वोट मुस्लिम समुदाय के ही थे, लेकिन यह भी कहना गलत नहीं होगा कि उनका अपने समुदाय के पक्ष में मतदान प्रतिशत काफी अच्छा रहा था, जो उनकी एकजुटता का परिचायक भी कहा जा सकता है। इसका अर्थ यह है कि इस बार यदि कोई मुस्लिम उम्मीदवार इस सीट से नहीं आता है तो यह वर्ग उस तरफ जा सकता है, जो इन्हें साधने में कामयाब हो जाएगा और ऐसी सूरत में उसी उम्मीदवार अथवा दल की जीत संभव भी कही जा सकती है। बता दें कि मुसलमानों को साधने का तेजी से प्रयास किया जा रहा है। गत दिवस भाजपा उम्मीदवार राव इंद्रजीत सिंह ने नूंह में रैली करके उन्हें साधने का प्रयास किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री मनोहरलाल भी मंच सांझा कर रहे थे। रैली में भीड़ भी अच्छी-खासी थी, जिससे गदगद होकर मुख्यमंत्री ने मेवात को किसी भी जिले से पीछे नहीं रहने देने का भरोसा दिलाया था। इधर कांग्रेस की नजर भी मेवात पर टिकी हुई है। कांग्रेस अपने ऊपर लगे मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप को हथियार बनाकर उन्हें अपना बनाने का प्रयास कर सकती है। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेंद्र/वेदपाल
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