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एक दर्जन सीटों पर 'अपने' ही बिगाड़ रहे समीकरण

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 17 2019 6:54PM
एक दर्जन सीटों पर 'अपने' ही बिगाड़ रहे समीकरण
जोधपुर/जयपुर, 17 अप्रेल (हि.स.)। लोकसभा चुनाव में दो खेमों में बंटी भारतीय जनता पार्टी के कई उम्मीदवारों को कांग्रेस उम्मीदवारों से अधिक अपने पार्टी के नेताओं के भितरघात का खतरा मंडरा है। वहीं कांग्रेस की भी खास सुखद स्थिति नहीं है और टिकट देने के बाद से नाराजगी का दौर थमने के बजाय बढता जा रहा है। दोनों पार्टी नेताओं की लाख कोशिशों के बावजूद नेताओं की नाराजगी कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। हालांकि नेताओं की मान मनुहार के बाद नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस व भाजपा प्रत्याशियों के साथ खडे तो नजर तो आने लगे है लेकिन उन जयचंदों से भितरघात की आशंका बरकरार है। बाडमेर, पाली, बीकानेर व अजमेर में दोनो दलों के उम्मीदवारों को भितरघात का खतरे का डर सता रहा है। वहीं भाजपा को दौसा, राजसमंद, नागौर, जोधपुर व जालोर सिरोही सीट पर तो कांग्रेस को जयपुर शहर, चितौडग़ढ़, चूरू और धौलपुर करौली सीट पर सबसे अधिक भितरघात होने का खतरा है। प्रदेश की बाडमेर, पाली, बीकानेर व अजमेर सीट ऐसी है, जहां कांग्रेस व भाजपा उम्मीदवारों की खिलाफत हो रही है। बाडमेर में भाजपा ने पूर्व विधायक कैलाश चौधरी को मैदान में उतारा है लेकिन उनको वर्तमान सासंद कर्नल सोनाराम खुली खिलाफत कर रहे है और उन्हें भाजपा मनाने की कोशिश कर रहे लेकिन भाजपा कई ओर नेता भी कैलाश चौधरी को टिकट दिए जाने से नाराज है। हालांकि उन्हें रालोपा के हनुमान बेनीवाल का पूरा समर्थन मिल रहा है लेकिन इस चक्कर में एक जाति विशेष के अलावा दूसरी जातियोंं के नेता दूरी बनाने लगे है। इस वजह से कैलाश को भितरघात का पूरा खतरा है। इधर कांग्रेस उम्मीदवार मानवेन्द्रसिंह के साथ उनके विरोधी माने जाने वाले तमाम नेता उनके साथ खड़े नजर आ रहे है, लेकिन भीतर ही भीतर कुछ नेता लामबंद होकर उनकी जीत नहीं होने देने की रणनीति बना रहे है। हालांकि अभी मानवेंन्द्र की स्थिति मजबूत है लेकिन उन्हें भीतरघात कितना नुकसान पहुंचा पाता है, यह देखना महत्वपूर्ण है। जोधपुर सीट पर भाजपा उम्मीदवार गजेंन्द्रसिंह शेखावत ने अपने विरोधी गुट के नेताओं में से अधिकांश को मना लिया और वे आला नेताओं के दबाव के चलते शेखावत के साथ अब प्रचार में नजर भी आने लगे लेकिन शेखावत पर भितरघात का खतरा कम नहीं हुआ है। इसी तरह पाली सीट पर भाजपा उम्मीदवार पीपी चौधरी के टिकट नहीं देने को लेकर एक सांसद सहित कई विधायक व पूर्व विधायक खुली खिलाफत कर चुके है। उनमें से अधिकांश को मनाने पर अब पीपी चौधरी के साथ खडे है लेकिन चौधरी को भितरघात से इंकार नहीं किया जा सकता है। इधर कांग्रेस के बद्रीराम जाखड को जाट समुदाय का समर्थन मिल रहा है लेकिन हनुमान बेनीवाल फैक्टर और मदेरणा परिवार की पुरानी नाराजगी से उन्हें भितरघात का खतरे के साथ पाली के कांग्रेसी नेताओं में आपसी खींचतान का नुकसान उठाना पड सकता है। मसलन पार्टी ने पूर्व विधायक भीमराज भाटी को वापस कांग्रेस में शामिल कर दिया तो केवलचंद गुलेच्छा नाराज हो गए। इसी तरह बीकानेर में भाजपा के उम्मीदवार अर्जुन मेघवाल को भाजपा में रहे देवीसिंह भाटी की खिलाफत वहां जातीय समीकरण बिगाडने के साथ भितरघात नुकसान पहुंचा सकते है। हालांकि वहां कांग्रेस उम्मीदवार भी पार्टी नेताओं के बीच चल रही अदरूनी कलह की वजह से भितरघात का खतरा बना हुआ है। धौलपुर करौली से घोषित किए कांग्रेस प्रत्याशी के विरोध में एक वर्ग विशेष ने ही मोर्चा खोल दिया था। वर्ग विशेष से आने वाले एक विधायक ने तो सीएम गहलोत के सामने ही इस्तीफे की पेशकश कर दी थी। इसी तरह अजमेर में कांग्रेस प्रत्याशी को लेकर अंदरखाने विरोध के सुर तेज होने लगे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी रिजु झुझुनवाला को नाराज नेताओं को मनाने के लिए काफी भागदौड़ करनी पड़ रही है लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार को भितरघात खतरा सबसे अधिक है। हालांकि वहां भाजपा भी नेताओं की आपसी गुटबाजी का सामना कर रही है। इससे भाजपा उम्मीदवार को भी भितरघात झेलना पड सकता है। वही चूरू में कांग्रेस प्रत्याशी रफीक मंडेलिया का अंदरखाने अपने समाज के लोगों के बीच विरोध झेलना पड़ रहा है। अल्पसंख्यक वर्ग के नेता ही उनके खिलाफ लामबंद होने लगे है। वहीं जयपुर शहर और जयपुर ग्रामीण में भी नाराजगी देखी जा रही है। जयपुर शहर में ज्योति खंडेलवाल को टिकट मिलने के बाद से टिकट के लिए दावेदारी जता रहे अन्य नेताओं में नाराजगी है। हालांकि नाराज नेताओं को मनाने के लिए डिनर और लंच पॉलिटिक्स का भी सहारा लिया गया है, लेकिन अंदरखाने नाराजगी अभी भी बरकार है। कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल की विधायक अमीन कागजी और महेश जोशी से मतभेद जगजाहिर हैं। जयपुर ग्रामीण से कांग्रेस प्रत्याशी कृष्णा पूनिया को लेकर भी कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी ने स्थानीय नेताओं की अनदेखी कर बाहरी को टिकट दिया है। इसके अलावा झुंझुनूं में ओला परिवार का टिकट कटने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। यहां पार्टी ने पूर्व विधायक श्रवण कुमार को टिकट दिया है। हिन्दुस्थान समाचार/सतीश/संदीप
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