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लालू के संघ से मिल होने वाला सुशील मोदी का बयान मानसिक दिवालियापन की पराकाष्ठा: तेजस्वी

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 17 2019 6:55PM
लालू के संघ से मिल होने वाला सुशील मोदी का बयान मानसिक दिवालियापन की पराकाष्ठा: तेजस्वी
पटना, 17 अप्रैल (हि.स.)। बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के राजद अध्यक्ष लालू यादव के संघ से मिले होने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि अपनी हार देख बौखलाहट में सुशील मोदी मानसिक दिवालियापन की पराकाष्ठा लांंघ गए हैं। सोशल मीडिया में ट्वीट करते हुए तेजस्वी यादव ने बुधवार को सुशील मोदी को “सृजन चोर” तक कह डाला। उन्होंने लिखा कि मानसिक दिवालियापन की पराकाष्ठा लांघ कर सुशील मोदी कह रहे हैं कि लालू यादव संघ से मिले हुए हैं। तेजस्वी यादव ने अपने पिता लालू यादव के लिए लिखा कि, "लालू यादव ने संघियों की आंखों में उंगली डाल बिगड़ैल, बलवाई संघियों की नाक में रस्सी पिरोई है। कोई और बहाना खोजो, राफेल चोर के गोतिया भाई सृजन चोर!'''' भड़ास निकालते हुए तेजस्वी ने प्रधानमंत्री का नाम लिए बिना सुशील मोदी को राफ़ेल चोर का गोतिया भाई सृजन चोर बताया और लिखा कि देश का लाखों करोड़ रुपया लुटाकर, लूटकर भागने वाले एक ही “वर्ण और जात-बिरादरी“ के हैं। उन्होंने लिखा कि लूटकर और लुटाकर भागने वाले डकैतों और चोर-लुटेरों में एक भी दलित-पिछड़ा, आदिवासी और मुसलमान नहीं है। तेजस्वी यादव ने अपने ट्वीट में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी निशाने पर लिया और लिखा कि नीतीश कुमार संघ की गोद में लेटे दूध पी रहे हैं। जब संघियों ने पलटी मारने के छह महीने बाद इनको दूध पिलाना बंद किया तो फिर लालू यादव की शरण में आना चाहते थे। उन्होंने सवाल किया कि नीतीश कुमार कब तक सृजन चोर जैसी पंचर स्टेपनी के बूते अपनी रेंगती राजनीति को खींचेंगे? तेजस्वी ने सुशील मोदी को “सृजन चोर जी” के सम्बोधन से लिखा कि लालू यादव ने संघ की घृणित व नफ़रती राजनीति को बिहार में पांव पसारने नहीं दिया। उन्होंने लिखा कि लालू यादव ने आडवाणी को नकेल डाल उनकी उन्मादी यात्रा को रोका और 15 वर्ष में एक भी दंगा होने नहीं दिया। इस बीच बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी भोजपुरी में ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री का नाम लिए बिना लिखा कि नीतीश एवं बड़का मोदी सिर्फ हवा-हवाई बात कर रहे हैं। बालूबंदी, शराबबंदी से बेरोज़गारी , नोटबंदी से लोगों को हुई परेशानी और लालूबंदी (लालू यादव को जेल में बंद) करके गरीब-गुरबा-दलित के पीठ पर छुरा भोंका गया है। उल्लेखनीय है कि सुशील मोदी ने एक निजी चैनल के साथ बातचीत में कहा था कि लालू यादव स्वार्थ के लिए किसी का पांव पकड़ सकते हैं, गिड़गिड़ा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर भाजपा से सहयोग लेने में भी परहेज नहीं करते हैं। सुशील मोदी ने कहा था कि 1973 में पटना यूनिवर्सिटी के चुनाव में जीतने के बाद लालू यादव आरएसएस को धन्यवाद देने संघ कार्यालय गए थे। बाद में 1974 में और 1977 में संघ की उन्होंने मदद भी ली थी। हिन्दुस्थान समाचार / रजनी /सुनील/विभाकर
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