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30 वीं शताब्दी होगी संकट की शताब्दी: राजेन्द्र

By HindusthanSamachar | Publish Date: Dec 8 2018 10:21PM
30 वीं शताब्दी होगी संकट की शताब्दी: राजेन्द्र
छपरा, 8 दिसम्बर (हि.स.)। 30 वीं शताब्दी संकट की शताब्दी होगी । यह बात मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित पर्यावरणविद राजेन्द्र सिंह ने शनिवार को जयप्रकाश विश्वविद्यालय में आयोजित व्याख्यान में कही । उन्होंने गंभीर खतरे की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज हम प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं । विकास के इस दौर में हम आगे तो, बढ़ रहे हैंं लेकिन आगे बढ़ने के क्रम में हमारे किसान जलवायु परिवर्तन को समझ नहींं पा रहे हैं । जयप्रकाश विश्वविद्यालय के सीनेट हाॅल में जल, जंगल एवं गंगा की अविरलता विषयक व्याख्यान के मुख्य वक्ता के रूप में उन्होंने प्रकृति की सुरक्षा, सुंदरता के उपायोग पर विस्तार से चर्चा की । उन्होंने कहा कि प्रकृति की आराधना ही सच्ची आराधना है । उन्होंने भगवान शब्द को परिभाषित करते हुए कहा कि ईश्वर में भूमि, गंगाजल, वायु और नीर समाहित है । इसलिये इन पंच महाभूतों के अतिरिक्त और कोई आराध्य नहींं है । भगवान को भूलकर आज हमारी प्रकृति संकट में है । उन्होंने बताया कि अपने 34 वर्ष के इस अभियान में एक सकारात्मक प्रयास के कारण 11 नदियों को पुनर्जीवित किया गया है । इसके लिये उन्होंने सरकार से कभी पैसा नहींं लिया । उन्होंने लोगों से प्रकृति को समझने और उसे संरक्षित करने की अपील की । अध्यक्षता जेपीविवि के कुलपति प्रो हरिकेश सिंह ने की । उन्होंने कहा कि राजेंद्र सिंह जैसे प्रसिद्ध पर्यावरणविद का मार्गदर्शन युवाओं के लिये प्रेरणादायक है । उन्होंने कहा कि भविष्य में भी विवि के छात्रों को उनका मार्गदर्शन मिलता रहेगा । कार्यक्रम का विषय प्रवेश पीआरओ डॉ केदारनाथ ने किया । इस मौके पर प्रतिकुलपति प्रो एके झा, कुलसचिव कर्नल मधुरेन्द्र के अलावा कई विभागों के प्राध्यापक तथा छात्र छात्राओं ने भाग लिया । हिन्दुस्थान समाचार / गुड्डू्/विभाकर
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