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जमात ए इस्लामी हिंद ने केंद्र सरकार से किसानों की समस्या हल करने की रखी मांग

By HindusthanSamachar | Publish Date: Dec 8 2018 9:25PM
जमात ए इस्लामी हिंद ने केंद्र सरकार से किसानों की समस्या हल करने की  रखी मांग
बहुत विलम्ब हो चुका अब मस्जिद या मंदिर का फैसला कोर्ट दे, बनाने की जिम्मेदारी सरकार की है धार्मिक संगठन की नहीं नई दिल्ली, 08 दिसम्बर (हि.स.) | जमात ए इस्लामी हिंद ने देश के किसानों की दयनीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से उनकी समस्या हल करने व हरसंभव मदद करने की अपील की है | जमात का कहना है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के खस्ताहाल किसानों की मदद करने का वादा किया था मगर मोदी सरकार के 4 साल के कार्यकाल के बाद भी कोई मदद नहीं की गई है जिससे किसान मांगों को लेकर बार-बार दिल्ली कूच कर रहे हैं | जमात मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में नायब अमीरे जमात नुसरत अली, महासचिव इंजीनियर सलीम अहमद एवं इंतजार नईम ने ये बातें कही | संवाददाता सम्मेलन में नायब अमीरे जमात नुसरत अली ने कहा कि केंद्र की मौजूदा हुकूमत से देश के किसानों को बहुत उम्मीदें थीं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को बहुत कुछ देने का वादा किया था जिसमें फसल बीमा योजना भी शामिल थी | मगर इस देश का किसान अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा है | स्वामीनाथन रिपोर्ट के आने के बाद भी किसानों को नजरअंदाज किया जा रहा है | बार-बार किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली आ रहे हैं और उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है | नायब अमीरे जमात ने सरकार से किसानों की सभी लंबित मांगों को पूरा करने की मांग की है | उन्होंने बुलंदशहर घटना पर स्थानीय पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी पर प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि बाद में पुलिस पर घटना को लेकर दबाव बनाया जा रहा है | उन्होंने शहीद इंस्पेक्टर सुबोध सिंह राठौर के घर वालों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए सरकार से उन्हें इंसाफ दिलाए जाने की मांग की है | इस मौके पर उन्होंने कहा है कि बुलंदशहर घटना में गोकशी का जो मामला उठाया जा रहा, अगर वह सही है तो हम कसूरवारो को कड़ी सजा दिलाए जाने के पक्ष में हैं | बाबरी मस्जिद के मामले पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए नायब अमीरे जमात ने कहा कि हम कोर्ट को किसी तरह से डिक्टेट नहीं कर सकते कि कोर्ट क्या करें और क्या ना करें | लेकिन हां हमारी ख्वाहिश यह जरूर है कि फैसला जल्द आना चाहिए क्योंकि इसमें काफी विलंब हो चुका है | यह कोर्ट पर निर्भर करता है कि वह आगे किस तरह से इस मामले को लेकर चलती है | उन्होंने कहा कि फैसला मस्जिद के हक में आए या मंदिर के हक में आए, मुसलमानों ने उसको स्वीकार करने की घोषणा कर दी है और वहां पर मस्जिद या मंदिर फैसला आने के बाद बनवाना इस सरकार की जिम्मेदारी है, ना की किसी धार्मिक या सामाजिक संगठन की | बाबरी मस्जिद की जमीन की खुदाई पर मिले अवशेषों के संबंध में उन्होंने सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वहां खुदाई में कुछ लोग कहते हैं मस्जिद के निशान मिले जबकि कुछ लोग कहते हैं कि मंदिर के मिले, जबकि इंडिपेंडेंट सर्वेयर का यह कहना है वहां मस्जिद के निशान मिले जिसकी पूरी फाइल कोर्ट के पास है और यह कोर्ट को तय करना है कि वहां पर क्या होना चाहिए | उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म में यह बात सत्य है कि अगर वहां मंदिर तोड़कर बनाई गई थी तो वहां मस्जिद नहीं हो सकती है, लेकिन पहले यह सिद्ध हो | उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू धर्म के लोग यह कहते हैं कि अगर मस्जिद तोड़कर मंदिर बनाई जाती है तो यह धार्मिक दृष्टिकोण से ठीक नहीं है, लेकिन सारा फैसला कोर्ट को करना है | हिंदुस्थान समाचार/ओवैस/शंकर
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