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टीएमसी छोड़ने के बाद पहली बार सचिवालय पहुंचे मुकुल रॉय, रथयात्रा पर बैठक का सहमति पत्र सौंपा

By HindusthanSamachar | Publish Date: Dec 8 2018 9:16PM
टीएमसी छोड़ने के बाद पहली बार सचिवालय पहुंचे मुकुल रॉय, रथयात्रा पर बैठक का सहमति पत्र सौंपा
कोलकाता, 08 दिसम्बर (हि.स.) । दो साल पहले तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विश्वस्त सहयोगी रहे मुकुल रॉय शनिवार को भाजपा के चुनावी सारथी बन गए हैं। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर भाजपा का दामन थामने के बाद वह शनिवार को पहली बार राज्य सचिवालय नवान्न पहुंचे थे। हाईकोर्ट से रथयात्रा को अनुमति नहीं मिलने की वजह से सात, नौ और 14 दिसम्बर की रथयात्राओं को रद्द कर दिया गया है। उनकी जगह नई रथ यात्राओं की सूची तैयार की जा रही हैं। कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ के निर्देशानुसार बुधवार के पहले राज्य सरकार को भाजपा के तीन शीर्ष नेताओं के साथ रथयात्रा के मुद्दे पर चर्चा करना है। इससे संबंधित सहमति पत्र सौंपने के लिए रॉय सचिवालय पहुंचे थे। उन्होंने अपने आवेदन में भाजपा के उन तीन नेताओं का नाम दिया है जो इस बैठक में शामिल होंगे हालांकि किसका किसका नाम दिया गया है इसका खुलासा नहीं किया गया। उनका आवेदन राज्य के मुख्य सचिव मलय दे, गृह सचिव अत्री भट्टाचार्य व राज्य पुलिस महानिदेशक विरेंद्र कुमार के पास पहुंचा गया है। उनके साथ प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार, संजय सिंह और कई अन्य नेता उपस्थित थे। सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों से अनुमति पत्र लेकर वे सचिवालय के 13वीं मंजिल पर जा पहुंचे। इसके ठीक एक तल्ला ऊपर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बैठती हैं। वहां डीजी कंट्रोल के पास मुकुल रॉय ने भाजपा के आवेदन से संबंधित प्रति जमा कराई और रिसीविंग लेकर वापस लौटे। मीडिया से बात करते हुए रॉय ने बताया कि भाजपा न्यायालय के आदेश का सम्मान करती है। जब तक आधिकारिक तौर पर न्यायालय से अनुमति नहीं मिल जाती तब तक रथ यात्राओं को स्थगित किया गया है। इससे संबंधित आवेदन भाजपा की ओर से सौंपा गया है। खंडपीठ ने राज्य सरकार को यह निर्देश दिया है कि आगामी बुधवार तक भाजपा नेतृत्व के साथ बैठकर रथ यात्राओं की अनुमति पर फैसला ले। सचिवालय की ओर से आमंत्रण मिलने के एक घंटे के अंदर भाजपा के तीन शीर्ष नेतृत्व रथ यात्रा की अनुमति संबंधित चर्चा में शामिल होने के लिए पहुंच जाएंगे। मुकुल रॉय का मानना है कि लोकसभा चुनाव होने में छह महीने का समय बाकी है। इस बीच न्यायालय के निर्देशों का सम्मान करते हुए कानूनी दायरे में रथयात्रा निकालने से भाजपा को अधिक लाभ होगा। रथयात्रा को जितना अधिक पीछे टाला जा रहा है उससे भाजपा को नुकसान के बजाय फायदा ही होने वाला है। हिन्दुस्थान‌ समाचार/ओम प्रकाश/मधुप/पी.के.
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