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बांग्लादेश में पाकिस्तान को हराने की याद में विजय दिवस की प्रस्तुति शुरू

By HindusthanSamachar | Publish Date: Dec 8 2018 9:11PM
बांग्लादेश में पाकिस्तान को हराने की याद में विजय दिवस की प्रस्तुति शुरू
कोलकाता, 08 दिसंबर (हि.स.)। साल 1971 की 16 दिसंबर का वह दिन हमेशा ही भारतीय सेना की वीरता के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा क्योंकि इसी दिन बांग्लादेश में पाकिस्तान के सैनिकों को भारत और बांग्लादेश की संयुक्त सेना ने न सिर्फ धूल चटाई थी बल्कि घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। इसकी याद में पिछले 46 सालों से विजय दिवस मनाया जाता रहा है। इस बार 47वां साल है और इस महा आयोजन की प्रस्तुति शुरू कर दी गई है। इसके एक सप्ताह पहले यानी शनिवार के दिन भारतीय सेना की ओर से विजय दिवस के आयोजन से संबंधित प्रस्तुति कार्यक्रम किया गया जिसमें बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमिश्नर तौफिक हसन, ब्रिगेडियर बीपी सिंह और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी और पदाधिकारी मौजूद थे। इस दौरान तौफिक हसन ने कहा कि कोलकाता स्थित बांग्लादेश दूतावास में 16 से 18 दिसंबर तक विजय दिवस मनाया जाएगा। प्रतिदिन अपराहन 3:00 बजे से रात 8:00 बजे तक तमाम तरह के कार्यक्रम किए जाएंगे। इसका उद्घाटन कोलकाता नगर निगम के नए मेयर फिरहाद हकीम करेंगे। इन कार्यक्रमों में मुक्ति युद्ध से संबंधित चित्रकारी प्रदर्शनी, बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी के वीरों को लेकर प्रतियोगिता और कई अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। उन्होंने बताया कि पिछले साल बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना दिल्ली गई थीं और बांग्लादेश और भारत की संयुक्त मुक्ति वाहिनी के सात जवानों के परिजनों को सम्मानित किया था। उसी तर्ज पर इस साल 17 से 25 मुक्ति वाहिनी के जवानों के परिजनों को "बांग्लादेश मुक्ति युद्ध सम्मान" दिया जाएगा। इस विजय दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बांग्लादेश के मंत्री एकेएम मुजम्मिल हक के नेतृत्व में नौ लोगों का एक शिष्टमंडल कोलकाता पहुंचेगा जिनके हाथों मुक्ति वाहिनी के योद्धाओं के परिजनों को सम्मानित किया जाएगा। इन लोगों को प्रशस्ति पत्र के साथ-साथ बांग्लादेश के जनक माने जाने वाले शेख मुजीबुर रहमान द्वारा लिखित "असमाप्त आत्म जीवनी" और "कारागारेर रोजनामचा" शीर्षक की पुस्तक दी जाएगी। इस दौरान ब्रिगेडियर बी. पी. सिंह ने 1971 के भीषण लड़ाई के दौरान भारतीय सेना के शौर्य और साहस पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस तरह से भारत और बांग्लादेश के सैनिकों ने मिलकर पाकिस्तानी सैनिकों को घुटने टेकने पर मजबूर किया था और भारत के हस्तक्षेप की वजह से बांग्लादेश की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो सकी थी। हिन्दुस्थान‌ समाचार/ ओम प्रकाश/मधुप
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