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ई-कोर्ट्स प्रोजैक्ट सिस्टम: अधिवक्ताओं व याचिकाकर्ताओं से लिया जायेगा फीडबैक

By HindusthanSamachar | Publish Date: Dec 8 2018 8:55PM
ई-कोर्ट्स प्रोजैक्ट सिस्टम: अधिवक्ताओं व याचिकाकर्ताओं से लिया जायेगा फीडबैक
चंडीगढ़, 08 दिसम्बर (हि.स.) । भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता ने ई-कोर्ट्स प्रोजैक्ट सिस्टम के सम्बन्ध में अधिवक्ताओं और याचिकाकर्ताओं से फीडबैक लेने पर बल दिया है ताकि इसमें और सुधार लाया जा सके। न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता शनिवार को चण्डीगढ़ न्यायिक अकादमी में उच्च न्यायालयों की कम्प्यूटर कमेटियों के दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। सम्मेलन का उद्घाटन पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की उपस्थिति में हुआ। ‘ई-कोर्ट्स प्रोजैक्ट-एक्सप्लोरिंग न्यू होरिजोन्स’ थीम का यह दो दिवसीय सम्मेलन ई-कोर्ट्स प्रोजैक्ट के सभी हितधारकों अर्थात न्याय विभाग, भारत के सर्वोच्च न्यायालय की ई-कमेटी, उच्च न्यायालयों की कम्प्यूटर कमेटियों, उच्च न्यायालयों के केन्द्रीय परियोजना समन्वयकों (सीपीसी) और एनआईसी जैसी सरकारी एजेंसियों को ई-कोर्ट्स प्रोजैक्ट के क्रियान्वयन तथा सम्बन्धित मामलों के सम्बन्ध में विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एक मंच उपलब्ध करवाएगा। सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता ने ‘न्यायालयों से ई-न्यायालयों तक’ न्यायिक प्रणाली के सफर का उल्लेख किया। उन्होंने न्यायिक प्रणाली में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी लागू करने में प्रारम्भिक प्रतिरोध पर प्रकाश डाला। उन्होंने ई-कोर्ट्स प्रोजैक्ट की सफलता और ई-सेवाओं से जनसाधारण को हो रहे लाभों का भी उल्लेख किया। न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी ने कहा कि न्यायिक प्रणाली और अधिक पारदर्शी हो गई है, क्योंकि केस स्टेटस और हिस्ट्री के सम्बन्ध में विस्तृत सूचना अब इलेक्ट्रोनिक प्लेटफार्म पर उपलब्ध है, जिस तक आसानी और शीघ्रता से पहुंचा जा सकता है। ई-कोर्ट्स प्रोजैक्ट को नागरिकों को उनके घर-द्वार पर न्याय मुहैया करवाने के संवैधानिक कर्त्तव्य को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए, उन्होंने कम्प्यूटरीकरण के मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय को अग्रणी बनाने में किए जा रहे कम्प्यूटर कमेटी के प्रयासों की सराहना की। न्यायिक प्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं दक्ष बनाने के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की आवश्यकता पर बल देते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने ऐसे मामलों, जहां दिमाग लगाने की आवश्यकता है, में प्रौद्योगिकी की अत्यधिक निर्भरता के प्रति भी सचेत किया। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की कम्प्यूटर कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति डा० रवि रंजन ने उल्लेख किया कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय की ई-कमेटी द्वारा की गई केन्द्रीयकृत परिकल्पना के सम्बन्ध में सभी उच्च न्यायालयों की उपलब्धियों को सांझा करना और सुधारों तथा नवाचारों के लिए विचारों का आदान-प्रदान करना है। सभी वक्ताओं ने ई-कोर्ट्स प्रोजैक्ट को सफल बनाने में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर द्वारा दिए गये योगदान की सराहना की। इस अवसर पर, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा नैशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड के साथ बेहतर कनैक्टिविटी के लिए केस इनफोर्मेशन सॉफ्टवेयर 1.0 शुरू किया गया। इसके अलावा, सभी उच्च न्यायालयों से लेखों की एक स्मारिका तथा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा की गई आईटी पहलों पर प्रकाश डालने वाली, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल द्वारा संकलित एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। आयोजन कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति महेश ग्रोवर ने सभी महानुभावों का धन्यवाद किया। हिन्दुस्थान समाचार/पंकज
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