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.. तो 5 साल तक आर-पार की लड़ाई लड़ता रहेगा किसान

By HindusthanSamachar | Publish Date: Dec 8 2018 8:49PM
.. तो 5 साल तक आर-पार की लड़ाई लड़ता रहेगा किसान
नरसिंहपुर, 08 दिसम्‍बर (हि.स.)। प्रदेश में भाजपा एक बार फिर सत्ता में वापसी करेगी या फिर कांग्रेस का 15 साल का वनवास खत्म हो जायेगा? जिले की चारों विधानसभा सीटों के नये कर्णधार कौन-कौन होंगे? इन सवालों के जवाब तो 11 दिसंबर को मिल जायेंगे, लेकिन विगत 2-3 वर्षों से किसान आंदोलनों का केंद्र रहे नरसिंहपुर जिले के अन्नदाता किसानों को अपने सवालों का जवाब कब मिलेगा? उनकी फसलें उचित मूल्य पर कब बिकेंगी? क्या राहर जैसे घोटालों पर विराम लग पायेगा? क्या मंडियों में पक्षपात बंद होगा? क्या भावांतर जैसी कथित लूट योजना किसानों का शोषण नही करेगी? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह कि हर आंदोलनों के केंद्र में रहा गन्ने का रिकव्हरी के आधार पर लाभकारी मूल्य उत्पादकों को मिल पायेगा या नही? गन्ने को लेकर जिले के प्रशासनिक महकमे व राजनैतिक दलों की नौटंकी तो खूब हुई लेकिन गन्ना उत्पादकों को अब तक उनका हक नही मिला। विदित हो कि विधानसभा चुनाव के एक वर्ष पूर्व से ही किसान आंदोलनों में आयी तेजी से जिले की चर्चा पूरे प्रदेश में होने लगी थी। किसान संघर्ष समिति, कांग्रेस नेताओं सहित अन्य किसान संगठनों ने यहां अनेक आंदोलन किये। इस दौरान यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा, डॉ. योगेंद्र यादव व शिवकुमार शर्मा कक्का जी जैसे नेताओं ने भी आंदोलनों को नेतृत्व प्रदान किया। यशवंत सिन्हा तो 6-7 दिन तक लगातार कलेक्ट्रेट के सामने डेरा डाले रहे। इन आंदोलनों से प्रशासन दवाब में भी आया और बुरहानपुर पेटर्न पर 300 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना खरीदी के लिए मिलों को निर्देश दिये गये, पर मिल मालिकों ने न प्रशासन के निर्देश तब माने न अब मान रहे हैं? 11 दिसंबर के बाद प्रदेश में आने वाली सरकार ने यदि किसानों की इस समस्या को अब भी नजरंदाज किया तो संभव है कि अगले 5 सालों तक किसान व सरकार के बीच आर-पार की लड़ाई चलती रहे। यदि जिले की चारों सीट में भाजपा पिछड़ी तो यकीन मानना पड़ेगा कि यह उलटफेर किसानों ने ही की है। रिश्वत की चाह में रिजेक्ट की जा रही धान शासन द्वारा जिले में निर्धारित किये गये 32 धान उपार्जन केंद्रों पर भी किसानों के साथ लूट करने के आरोप लगने लगे हैं। इस संबंध में सपाक्स के डॉ. संजीव चांदोरकर ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि 32 धान उपार्जन केंद्रों के रूप में किसानों के सामूहिक लूट और अपमान के केंद्र चालू किए। न ही समय पर धान तुल रही है और न ही किसानों के साथ सही सलूक किया जा रहा है। इन केंद्रों में अन्नदाताओं से दोयम दर्जे के नागरिकों की तरह व्यवहार किया जा रहा है। किसानों को दिन-दिन भर खड़ा रखने के बाद रिश्वत की चाह में कोई न कोई कारण बताकर धान को रिजेक्ट कर उन्हें बैरंग लौटाया जा रहा है। इस संबंध में डॉ. चांदोरकर ने कहा कि प्रशासन तो नये निजाम के आगमन की तैयारियों में मशगूल है। हर दल के नेता अब वोट प्राप्त कर चुके हैं, उन्हे विजय का इंतजार है तो वे गरीब असहाय अन्नदाताओं की क्यों चिंता करें? सपाक्स पार्टी ने मांग की है कि सरकार तत्काल स्वामीनाथन की सिफारिशों को लागू करे। मिलों द्वारा गन्ने की 350 रूपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की जाये। अन्यथा की स्थिति में किसान उग्र प्रदर्शन करने विवश होंगे। किसानों को मिले 350 रुपये प्रति क्विंटल वहीं बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव एड. नारायण पटैल व अन्य कार्यकर्त्ताओं द्वारा कलेक्टर के माध्यम से शनिवार को राज्यपाल के नाम सौंपे गये ज्ञापन में बताया गया कि जिले में अनेक सुगर मिलें व खांडसारी सुगर मिलें हैं, लेकिन यहां किसानों को प्रमुख फसल गन्ने का उचित मूल्य नही मिलता, जिससे वे अपनी उपज ओने-पोने दामों में बेचने विवश हैं। जिले के गन्ने की बेहतर सुगर रिकव्हरी होने के बावजूद सुगरमिल मालिक किसानों का लगातार शोषण करते आ रहे हैं। जिलें में किसानों को एक क्विंटल गन्ने का महज 260 से 265 रूपये दिया जा रहा है, जबकि आसपास के प्रदेशों में किसानों का गन्ना 325 से अधिक दाम में बिक रहा है। बसपा ने मांग की है कि जिले के किसानों को कम से कम 350 रूपये प्रति क्विंटल का भाव दिलाया जाये। हिन्‍दुस्‍थान समाचार/संजय
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