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नालंदा खुला विश्वविद्यालय में 28 स्वर्ण पदकों में से 22 स्वर्ण पदक हासिल कर छात्राओं ने रचा इतिहास

By HindusthanSamachar | Publish Date: Dec 8 2018 8:51PM
नालंदा खुला विश्वविद्यालय में 28 स्वर्ण पदकों में से 22 स्वर्ण पदक हासिल कर छात्राओं ने रचा इतिहास
पटना,08 दिसम्बर(हि.स.)। बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लालजी टंडन ने कहा है कि आज देश में शिक्षा के विकास के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं है और हरसंभव भी प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत में उच्च शिक्षा का तेजी से विस्तार हुआ है और अब उच्च शिक्षा राज्य क्षेत्र से बाहर निकलकर गैर-परम्परागत तथा निजी क्षेत्र में भी तेजी से बढ़ रही है। उच्च शिक्षा के इस विस्तार में केवल परम्परागत तरीके की शिक्षा ही महत्त्वपूर्ण नहीं है अपितु गैर-परम्परागत शिक्षा, जैसे -दूरस्थ शिक्षा-पद्धति आदि का भी महत्त्व बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है। राज्यपाल आज यहां बापू सभागार में नालंदा खुला विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षान्त समारोह को अध्यक्षीय पद से संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में राज्यपाल ने स्वर्णपदक-विजेता विद्यार्थियों को ‘गोल्ड मेडल’ एवं प्रमाण-पत्र देने के बाद कहा कि ‘आज के दीक्षांत समारोह में कुल 28 स्वर्ण-पदक विजेताओं में बेटियों की संख्या 22 है। सर्वोच्च स्तर का प्रदर्शन करने में बेटियों के बढ़ते वर्चस्व को मैं अच्छे सामाजिक बदलाव के साथ ही नारी सशक्तीकरण के रूप में देखता हूँ। यह बदलाव ही हमारे देश और समाज को सही अर्थों में विकसित देश और समाज के रूप में प्रतिष्ठा दिला सकेगा। ऐसे समाज में हमारी शिक्षित बेटियाँ सफलता की नित नयी ऊँचाइयाँ हासिल करेंगी। राज्यपाल ने कहा कि हमारें प्राचीन काल से ही शिक्षा को विशेष महत्त्व दिया जाता रहा है। शिक्षा न केवल जीवन-यापन के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करती है, बल्कि मनुष्य में आदर्श मूल्यों का विकास भी करती है तथा उसे अपने कर्तव्यों एवं अधिकारों का बोध भी कराती है। राज्यपाल ने डाॅ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उद्धृत करते हुए कहा कि ‘हमारे विश्वविद्यालयों को उस स्वतंत्रता और विचार-अभिव्यक्ति का प्रतिनिधि बनना होगा, जो एक सच्चे लोकतंत्र की आवश्यकता है। हमारे विद्यार्थियों को लोगों के मन से अविश्वास का जाल और नफरत का जहर दूर करना होगा।’ उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नालंदा खुला विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के चरित्र-निर्माण का भी गुरूतर दायित्व कुशलतापूर्वक निभा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में विक्रमशिला एवं नालन्दा जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों का अस्तित्व ज्ञान, विद्या एवं शिक्षा के प्रति हमारे संकल्प को प्रदर्शित करता है। अब हम विश्व को पुनः नेतृत्व प्रदान करने के लिए सक्षम होते दिख रहे हैं। श्री टंडन ने कहा कि वस्तुतः आज भारत का सांस्कृतिक पुनरोदय हो रहा है। उन्होंने ने कहा कि आज हमारा नेतृत्व न केवल कौशलपूर्ण है, अपितु मूल्यों पर आधारित जीवन-पद्धति में विश्वास रखता है। राज्यपाल ने कहा कि -‘मुझे बहुत खुशी है कि आज नालन्दा खुला विश्वविद्यालय ने अपने तेरहवें दीक्षान्त समारोह का आयोजन किया है।’ उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय बिहार का एकमात्र विश्वविद्यालय है, जो वर्ष 2018 की परीक्षा की सारी प्रक्रियाएँ पूरी कर इसी वर्ष अपने उत्तीर्ण विद्यार्थियों को उपाधि भी प्रदान कर रहा है। उन्होंने ने कहा कि राज्य के अन्य सभी विश्वविद्यालय भी जब अपने निर्धारित ‘परीक्षा कैलेण्डर’ के अनुरूप परीक्षा-आयोजन, परीक्षाफल-प्रकाशन तथा डिग्री-वितरण का कार्य ससमय सुनिश्चित कर पाने में सफल हो जाएँगे -वही आदर्श स्थिति सभी बिहारवासियों के लिए वास्तविक संतोष और प्रसन्नता की होगी। उन्होंने कहा कि ‘दीक्षान्त’ का अर्थ पढ़ाई का अन्त नहीं है। ‘दीक्षान्त’ वास्तव में जीवन की लम्बी यात्रा का एक पड़ाव है, इसके आगे ज्ञान की खोज में बढ़ते जाना है। उन्होंने उपाधिप्राप्तकर्ता विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज चारित्रक गुणों का परिवर्द्धन अनिवार्य है। आत्मानुशासन चरित्र-निर्माण का मेरूदंड है। नैतिक मूल्य व मर्यादा से ही सामाजिक बुराइयों पर अंकुश लग सकता है। स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ विचार जीवन और जगत को भयमुक्त बनाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में आप अपने उच्च नैतिक मूल्यों और प्राप्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बदौलत राष्ट्र-निर्माण में सशक्त और सार्थक भूमिका निभाएँगे।’’ शिक्षामंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने कहा कि नालंदा खुला विश्वविद्यालय के विकास के लिए राज्य सरकार दृढ़संकल्पित है और हर तरह का सहयोग करने को तैयार है। नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुलपति आर.के.सिन्हा ने विश्वविद्यालय का प्रगति-प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और धन्यवाद-ज्ञापन प्रतिकुलपति प्रो कृतेश्वर प्रसाद ने किया। समारोह का संचालन कुलसचिव डाॅ एसपी सिन्हा ने किया। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह, संयुक्त कुलसचिव अमरनाथ पाण्डेय एवं अन्य कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, विश्वविद्यालय-अधिकारी एवं गणमान्य जन आदि उपस्थित थे। हिन्दुस्थान समाचार/अरुण
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