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बेटियों का बढ़ता वर्चस्व सामाजिक बदलाव व नारी सशक्तीकरण का उदाहरण : राज्यपाल

By HindusthanSamachar | Publish Date: Dec 8 2018 8:44PM
बेटियों का बढ़ता वर्चस्व सामाजिक बदलाव व नारी सशक्तीकरण का उदाहरण : राज्यपाल
पटना, 08 दिसम्बर (हि.स.)। बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लाल जी टंडन ने कहा कि 28 स्वर्ण पदकों में से 22 स्वर्ण पदक जीत कर नालंदा खुला विश्वविद्यालय की छात्राओं ने एक इतिहास रच दिया है। वे शनिवार को स्थानीय बापू सभागार में नालंदा खुला विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षान्त समारोह को संबोधित कर रहे थे। टंडन ने कहा कि सर्वोच्च स्तर का प्रदर्शन करने में बेटियों का बढ़ता वर्चस्व अच्छे सामाजिक बदलाव के साथ ही नारी सशक्तीकरण का बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव ही देश और समाज को सही अर्थों में विकसित देश और समाज के रूप में प्रतिष्ठा दिला सकेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे समाज में हमारी शिक्षित बेटियाँ सफलता की नित नई उंचाई हासिल करेंगी। राज्यपाल ने कहा कि देश में प्राचीन काल से ही शिक्षा को विशेष महत्व दिया जाता रहा है। शिक्षा न केवल जीवन यापन के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करती है, बल्कि मनुष्य में आदर्श मूल्यों का विकास भी करती है और कर्तव्यों एवं अधिकारों का बोध भी कराती है। राज्यपाल ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को स्वतंत्रता और विचार अभिव्यक्ति का प्रतिनिधि बनना होगा, जो एक सच्चे लोकतंत्र की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को लोगों के मन से अविश्वास का जाल और नफरत का जहर दूर करना होगा। राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि नालंदा खुला विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण का भी गुरुतर दायित्व कुशलता पूर्वक निभा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में विक्रमशिला एवं नालन्दा जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों का अस्तित्व ज्ञान, विद्या एवं शिक्षा के प्रति हमारे संकल्प को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व को पुनः नेतृत्व प्रदान करने के लिए सक्षम है। वस्तुतः आज भारत का सांस्कृतिक पुनरोदय हो रहा है। आज हमारा नेतृत्व न केवल कौशलपूर्ण है, अपितु मूल्यों पर आधारित जीवन पद्धति में विश्वास रखता है। राज्यपाल ने कहा कि आज देश में शिक्षा के विकास के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं है और हर सम्भव प्रयास भी किए जा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत में उच्च शिक्षा का तेजी से विस्तार हुआ है। अब उच्च शिक्षा राज्य क्षेत्र से बाहर निकलकर गैर परम्परागत तथा निजी क्षेत्र में भी तेजी से बढ़ रही है। राज्यपाल ने कहा कि नालन्दा खुला विश्वविद्यालय बिहार का एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय है, जो इस वर्ष की परीक्षा की सारी प्रक्रियाएं पूरी कर उत्तीर्ण विद्यार्थियों को उपाधि भी प्रदान कर रहा है। टंडन ने कहा कि दीक्षान्त का अर्थ पढ़ाई का अन्त नहीं बल्कि वास्तव में जीवन की लम्बी यात्रा का एक पड़ाव है और इसके आगे ज्ञान की खोज में बढ़ते जाना है। राज्यपाल टंडन ने कहा कि चारित्रिक गुणों का परिवर्द्धन अनिवार्य है। आत्मानुशासन को चरित्र निर्माण का मेरुदंड बताते हुए उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्य व मर्यादा से ही सामाजिक बुराइयों पर अंकुश लग सकता है। स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ विचार जीवन और जगत को भयमुक्त बनाते हैं। टंडन ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम में राज्यपाल ने स्वर्ण पदक विजेता विद्यार्थियों को ‘गोल्ड मेडल’ एवं प्रमाण-पत्र भी प्रदान किये। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य के शिक्षामंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने कहा कि नालंदा खुला विश्वविद्यालय के विकास के लिए राज्य सरकार दृढ़संकल्पित है और हर तरह का सहयोग करने को तैयार है। कार्यक्रम में नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुलपति ने विश्वविद्यालय का प्रगति-प्रतिवेदन प्रस्तुत किया । हिन्दुस्थान समाचार / रजनी/शंकर
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