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राजनीति राज्य के क्षमता निर्माण का अभिन्न हिस्सा : खेमानी

By HindusthanSamachar | Publish Date: Dec 8 2018 8:37PM
राजनीति राज्य के क्षमता निर्माण का अभिन्न हिस्सा : खेमानी
पटना, 08 दिसम्बर (हि.स.)। विश्व बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री स्तुति खेमानी ने कहा कि राजनीति राज्य के क्षमता निर्माण का अभिन्न हिस्सा है। आद्री, पटना स्थित आर्थिक नीति एवं लोक वित्त केंद्र द्वारा ''सिद्धांत, व्यवहार और चुनौतियां'' विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन शनिवार को उन्होंने सुधार करने वाले नेताओं को अपनी सेवाएं उपलब्ध कराने और क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों के समाधान में अराजनीतिक, पक्षपातरहित अंतरराष्ट्रीय विकास साझीदारों की भूमिका को रेखांकित किया 1 उन्होंने बताया कि कमजोर पहल और पेशेवर मानकों की कमी विकासशील देशों में राज्य की क्षमता कम रहने के मामले में सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण अवरोध हैं। उन्होंने कहा कि क्षमता को उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम लाभ देने के लिहाज से विकसित किया जा सकता है। बिहार में आयुष्मान भारत की स्थिति और संभावनाओं पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता करते हुए बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने कहा कि जरूरत इस बात की है कि जमीनी स्तर पर आम आदमी की जरूरतें पूरी करने के लिए स्वास्थ्य संबंधी उपयुक्त माहौल तैयार किया जाये । बिहार में सरकार इस दिशा में कठिन प्रयत्न कर रही है और स्वास्थ्य संबंधी सूचकों में विगत वर्षों के दौरान काफी सुधार दिखा है। उन्होंने कहा कि बिहार की केवल 6.2 प्रतिशत जनसंख्या स्वास्थ्य बीमा के तहत आच्छादित है। स्वास्थ्य की देखरेख पर अपने सकल घरेलू उत्पाद का राज्य सिर्फ एक प्रतिशत खर्च करता है। भारतीय राज्यों के बीच बिहार में निजी स्वास्थ्य प्रावधानों पर सबसे अधिक निर्भरता है। इस संदर्भ में आयुष्मान भारत की प्रभावी पहल का बिहार के स्वास्थ्य देखरेख और बीमा संबंधी मामले पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। ‘जलवायु परिवर्तन को मुख्य धरा में लाने में लोक वित्त का प्रभाव’ विषय पर आयोजित सत्र में बोलते हुए आइआइईडी, यूके के मुख्य अर्थशास्त्री पॉल स्टील तथा पूर्णिमा दासगुप्ता ने जलवायु संबंधी व्यय पर प्रकाश डाला । एक अन्य वक्ता केनेथ मैकक्लून ने उल्लेख किया कि कि जलवायु परिवर्तन के मामले में राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तपोषण बड़े पैमाने पर आवश्यक है। सेंटर फॉर स्टडीज इन सोशल साइंसेज कोलकाता में औद्योगिक अर्थशास्त्र के चेयर प्रोफेसर सुगत मारिजित ने कहा कि संतुलित बजट की स्थिति को बिना विरूपित किए वितरण निरपेक्ष राजकोषीय नीति का निर्माण किया जाना चाहिए । गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट के प्रो. अरिंदम दासगुप्ता ने भारत में वस्तु एवं सेवा कर के टिकाउ होने पर संदेह प्रकट किया। उन्होंने संकेत किया कि वस्तु एवं सेवा कर को लागू किए एक वर्ष से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी इसमें सुधार किए ही जा रहे हैं। मौलाना आजाद कौलेज, कोलकाता के अर्थशास्त्र के प्रो. शांतनु घोष ने पश्चिम बंगाल में लोक वित्त के हाल के रुझानों का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि हालिया रुझान दर्शाते हैं कि पिछले तीन वर्षों में राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। भारत में स्वास्थ्य आच्छादन के वित्तपोषण की चुनौतियों और अवसरों पर मेलबोर्न विश्वविद्यालय के प्रो. अजय महाल ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के लिए रकम को निजी स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र पर भरोसा करके पाया जा सकता है, लेकिन दिक्कत यह है कि स्वास्थ्य बीमा के मुद्दे पर नजर रखने के लिए खास तौर पर तैयार नहीं है। बिहार सरकार के श्रम विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह की अध्यक्षता में चले स्वास्थ्य संबंधी एक अन्य सत्र में आद्री के सेंटर फॉर हेल्थ पालिसी के विकास आर केशरी और शाश्वता घोष ने पाया कि भारत में मध्य वर्ग की बड़ी संख्या को प्रधाण मंत्री जन-धन योजना और स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे से बाहर रखा जा रहा है। भारत में स्वास्थ्य बीमा का आच्छादन कुल आबादी का मात्र 25 प्रतिशत है जिसमें नियोक्ताओं द्वारा कराए गए और समुदाय आधारित स्वास्थ्य बीमा का बहुत कम हिस्सा है। हिन्दुस्थान समाचार / रजनी/शंकर
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