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आयुर्वेद में संभव है पैंक्रियाटाईटिस का इलाज

By HindusthanSamachar | Publish Date: Dec 8 2018 8:20PM
आयुर्वेद में संभव है पैंक्रियाटाईटिस का इलाज
वाराणसी, 08 दिसम्बर (हि.स.)। पैंक्रियाटाईटिस का उपचार आयुर्वेदीय रसौषधियों और आहार पर नियन्त्रण करके किया जा सकता है। आयुर्वेद में इसका इलाज सम्भव हैं। पैंक्रियाटाईटिस का निदान आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के मापदंडो पर निर्धारित कर किया जाता हैं। शनिवार को यह बातें वैद्य पद्मश्री बालेन्दु प्रकाश ने कही। अवसर रहा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय के रस शास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग की ओर से आयोजित विशेष व्याख्यान माला का। उन्होंने बताया कि पैंक्रियाटाईटिस एक लाइलाज बीमारी है। जिसकी चिकित्सा आधुनिक चिकित्सा शास्त्र से पूर्ण रूपेण सम्भव नहीं है। इस बीमारी में मरीज को पेट के मध्य में भयंकर दर्द होता है। यह बीमारी क्यों होती है यह भी स्थापित नहीं है। उन्होंने बताया कि इसके इलाज में आर्युवेदिक औषधि में ताम्र भस्म एवं अन्य वनस्पति का प्रयोग किया गया हैं। नियंत्रित आहार तीन बार, पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक विश्राम से एवं उनकी औषधि अमर, नारिकेल लवण, रसोंन वटी आदि मरीज की विशिष्ट प्रकृति के अनुसार पित्त शामक औषधियों का प्रयोग कर पैंक्रियाटाईटिस को नियन्त्रित किया जा सकता है। व्याख्यानमाला में वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने अपने द्वारा विकसित औषधि अमर की वैज्ञानिक विश्लेषण सरंचना, प्रायोगिक परीक्षण की विधियों से भी छात्रों को अवगत कराया। विद्यार्थियों को उत्साहित करते हुये वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने कहा कि छात्रों को पुरुषार्थ करना चाहिये,यदि आप साधना शुरू करेंगे तो साधन अपने आप बनते जायेंगे। व्याख्यानमाला की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर आनन्द चौधरी ने बताया कि निरन्तर चार वर्षो से यथा 2015, 2016, 2017 एवं 2018 के मेडिसिन के नोबल पुरूस्कार उन सिद्धांतो पर मिल रहे हैं जो आयुर्वेद में वर्णित हैं। लेकिन भारतीय वैज्ञानिक उन पर शोध नहीं करते हैं अतः हम नोबल पुरुस्कारों से दूर हैं। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर/दीपक/संजय
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