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बड़ा खुलासा : चिटफंड जांच को प्रभावित करने में चार केंद्रीय और तीन प्रशासनिक अधिकारियों की संलिप्तता

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 10 2018 9:27PM
बड़ा खुलासा : चिटफंड जांच को प्रभावित करने में चार केंद्रीय और तीन प्रशासनिक अधिकारियों की संलिप्तता
कोलकाता, 10 नवंबर (हि.स.)। राज्यभर में चिटफंड मामलों की जांच को प्रभावित करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों और मामले में फंसे नेताओं तथा चिटफंड मालिकों के बीच पॉलीटिकल ब्रोकर के रूप में काम करने वाले सुदीप्त राय चौधरी से पूछताछ के बाद कई बड़े खुलासे हो रहे हैं। चौधरी को गत रविवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने गिरफ्तार किया था। अब पूछताछ में उसने इस बात का खुलासा किया है कि रोज वैली मामले में जांच की गति को प्रभावित करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों के चार और राज्य पुलिस के तीन अधिकारियों ने बड़ी धनराशि घूस के रूप में ली थी। इन सबके बीच लिंक मैन के रूप में सुदीप्त ही था। राज्य सरकार के प्रशासनिक अधिकारी मामले में फंसे नेताओं और अन्य आरोपितों की ओर से धनराशि लेकर केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाए थे। इन सभी के बीच सुदीप्त लिंक मैन के रूप में काम कर रहा था। इन सात अधिकारियों में एक आईपीएस भी है। शनिवार को ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। हालांकि उन्होंने इस मामले में संलिप्त इन सातों अधिकारियों का नाम या किसी भी तरह का परिचय बताने से इंकार कर दिया। उक्त अधिकारी ने बताया है कि सुदीप्त से पूछताछ में यह साफ हो चला है कि केंद्रीय और राज्य स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों ने चिटफंड मामलों की जांच को प्रभावित करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इसमें बड़ी संख्या में रुपये का लेन-देन भी हुआ है। यह सारा लेन-देन अलग-अलग समय पर किया गया है। उसके बयान को आधार बनाकर ईडी की टीम इसकी पुष्टि करने के लिए जांच में जुट गई है। ज्ञात हो कि उसे रविवार को गिरफ्तार किया गया था और सोमवार को उसने पूछताछ में खुलासा किया था कि सारदा और रोजवैली जैसी 12 चिटफंड कंपनियों के निदेशकों से वह करोड़ों रुपये वसूला था। दावा है कि उनके खिलाफ सीबीआई जांच की गति को धीमी करने और जांच को दूसरी दिशा में मोड़ने के लिए वह रुपये वसूलता था और उन रुपयों को कथित तौर पर जांच कर रहे अधिकारियों की जेब में भरता था। इस तरह से वह कथित तौर पर जांच एजेंसियों को चिटफंड निदेशकों और उसमें फंसे नेताओं के लिए मैनेज करने का काम करता था। इस लिंक के कारोबार के जरिए उसने 100 करोड़ से अधिक की संपत्ति अर्जित की है। माना जा रहा है कि सारदा, रोजवैली जैसी चिटफंड कंपनियों व नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामले में पिछले चार सालों से अधिक समय से हो रही जांच के बावजूद किसी ठोस नतीजे पर केंद्रीय एजेंसियों के नहीं पहुंचने के पीछे यह शख्स था और इसी ने घूस आदि देकर जांच को प्रभावित किया था। जब सीबीआई के दोनों से निदेशकों में बड़े पैमाने पर घमासान चला तो अग्रिम सतर्कता बरतते हुए ईडी ने इसे गिरफ्तार कर लिया था। अब जब इसने इस बात का खुलासा किया है कि जांच को प्रभावित करने में उसके साथ केंद्रीय और राज्य स्तर के प्रशासनिक अधिकारी भी मिले हुए थे तो यह साफ हो चला है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद हो रहे खुलासे एक बार फिर केंद्रीय स्तर पर जांच एजेंसियों में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोलने वाले हैं। हिन्दुस्थान‌ समाचार/ ओम प्रकाश/मधुप
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