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जनजातीय समस्या को राज्य सरकार पर नहीं छोड़ा जा सकता : डॉ सुभाष कश्यप

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 10 2018 7:12PM
जनजातीय समस्या को राज्य सरकार पर नहीं छोड़ा जा सकता : डॉ सुभाष कश्यप
रांची, 10 नवम्बर (हि.स.)। संविधान विशेषज्ञ और लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ सुभाष कश्यप ने कहा कि जनजातीय समस्या को राज्य सरकार पर नहीं छोड़ा जा सकता है। इसके लिए केंद्र सरकार को पहल करनी होगी। उन्होंने कहा कि जनजातीय मामला केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आएगा। केंद्र के प्रतिनिधि राज्यपाल होते हैं। उनको इस मामले में कुछ विशेष अधिकार दिए गए हैं। डॉ कश्यप शनिवार को मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ठ सभागार में डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान, रांची की ओर से पांचवी अनुसूची पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति कौन है, इसकी परिभाषा संविधान में नहीं की गयी है। राज्यपाल ऐसे लोगों को चिन्हित करवा सकते हैं। देश के कुछ जनजातियों को विशेष अधिकार प्राप्त हैं। डॉ कश्यप ने कहा कि पांचवी अनुसूची को समझने के लिए उसका इतिहास जानना होगा। अंग्रेजों के समय में यह शुरू हुआ। अंग्रेजों का मानना था कि देश के कुछ भाग पिछड़े हुए हैं। उन पर कोई राजनीतिक संस्था काम कर सकती है। उन्हें आदिवासी कहने लगे। उन्होंने कहा कि 1874 में शिड्यूल डिस्ट्रिक्ट एक्ट बना। 1935 में भारत शासन अधिनियम पहली बार बना। ट्राइबलों के कुछ मामलों में राज्यपाल स्वयं निर्णय ले सकते हैं। कुछ मामलों में कैबिनेट को भी अधिकार हैं। अंग्रेजी शासन काल में जो कानून बनाया गया, उससे झारखंड का कल्याण नहीं हो पाया। आजादी के 70 वर्ष बाद भी ट्राइबल प्रापर्टी कॉर्पोरेट सहित अन्य के हाथों में चली गयी। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार सबसे पहले आदि पुरुष कश्यप ऋषि को माना जाएगा। हम सब भारतीय हैं। संविधान में सबको मूल अधिकार मिला है। कुछ लोग पिछड़े रह गये हैं। उन्हें बराबरी के लिए विशेष अधिकार दिये गये हैं। पैसा-कानून ट्राइबल एरिया के लिए है। उन्होंने कहा कि झारखंड में पत्थलगड़ी को लेकर आंदोलन जारी है। इसका समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। इसका समाधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्राइबलों के अधिकार, जमीन, खनन आदि को लेकर सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णय हैं। कश्यप ने झारखंड की तारीफ करते हुए कहा कि देश के सुंदरतम राज्यों में से एक है। यहां की प्राकृतिक छवि, सोना, झरना मनमोहक है। रांची देश की राजधानियों में सुंदरतम है। राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि झारखंड में 24 जिले हैं। यहं 32 प्रकार के आदिवासी रहते हैं। इन आदिवासियों के संविधान में क्या अधिकार है, उनके लिए क्या प्रावधान है यह उन्हें जानकारी नहीं है। देश को आजाद हुए 70 वर्ष हो गये, लेकिन आदिवासियों को आज भी उनके हक और अधिकार नहीं पता हैं। हमें ऐसे लोगों के बीच में जागरुकता लानी होगी, ताकि वे अपना अधिकार और हक जान सकें। उन्होंने कहा कि झारखंड में ट्राइबल अफेयर्स मिनिस्ट्री नहीं है। 15 नवम्बर को राज्य स्थापना दिवस पर इसे डिक्लीयर किया जाएगा। यहां के आदिवासी उतने शिक्षित नहीं हैं, जितना की होना चाहिए। यहां अंधविश्वास और कुरीतियां हैं। इसे दूर करना है। इसके लिए हमें मिलकर काम करना होगा। हिन्दुस्थान समाचार/कृष्ण/महेश/वीरेन्द्र
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