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शीत ऋतु की शुरुआत में ही प्रवासी पक्षियों ने चित्तौड़ जिले में दी दस्तक

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 13 2018 9:10PM
शीत ऋतु की शुरुआत में ही प्रवासी पक्षियों ने चित्तौड़ जिले में दी दस्तक
चित्तौडग़ढ़, 13 अक्टूबर (हिस)। राजस्थान के दक्षिणी भाग में स्थित चित्तौडगढ़ जिले के तालाब और जलाशयों में सुदूर देशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देने लग गई है। हर वर्ष अक्टूबर अंत तक शीतकालीन प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता है, जो वर्षों से चली आ रही प्रक्रिया है। लेकिन इस बार अक्टूबर माह के प्रारंभ में ही प्रवासी पक्षियों ने डेरा डाल दिया है। प्रवासी पक्षियों को चित्तौड़गढ़ जिले की आबोहवा खासी रास आती है। वहीं अक्टूबर के पहले ही सप्ताह में प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति इस बात को इंगित करती है कि इस वर्ष इस वर्ष शीतकाल की अवधि लंबी हो सकती है। चित्तौड़गढ़ जिले में वर्षों से प्रवासी पक्षी प्रजनन व जीवन यापन के लिए शीत ऋतु में आते हैं। जिले के बड़वाई तालाब, नंगावली तालाब सहित अन्य जलाशयों पर हर वर्ष प्रवासी पक्षी आकर्षण का केन्द्र रहते है। पक्षी प्रेमियों के लिए सर्दी का मौसम मेले की तरह होता है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार पक्षी मौसम की पहचान सूर्य से आने वाली प्रकाश की मात्रा व दैनिक प्रकाश के आधार पर करते हैं। सही समय आने पर अपनी प्रवास यात्रा प्रारंभ कर देते हैं, जो भोजन की उपलब्धता, खराब मौसम, तापमान इत्यादि पर निर्भर होती हैं। हमारे कई वैदिक साहित्य व ग्रथों में पक्षियों की प्रवास का उल्लेख मिलता है। पक्षियों के पास कोई नक्शा, यंत्र आदि नहीं होते हैं। पक्षी पृथ्वी के गुरूत्वार्कषण सूर्य, तारे, चनद्रमा व जलाशय की सहायता से निश्चित गमन करते है। कुछ छोटे-छोटे पक्षी तो 10 हजार मील तक का प्रवासन भी करते हैं। सर्दियो में पूर्वी यूरोप तथा यूरेशीया के देशों मे भयंकर सर्दी पड़ती हैं तथा बर्फीले क्षेत्रों के कारण भोजन की उपलब्धता भी कम हो जाती हैं। इस कारण कई पक्षी प्रजातियां कम ठंडे प्रदेशों की और प्रवासन करती है। संयुक्त राष्ट्र संघ की आनुशांशिक इकाई आईयूसीएन व एसएसजी के सदस्य व पर्यावरण विद् डॉ. मोहम्मद यासीन ने बताया की चित्तौडग़ढ़ जिले मे कुल 243 पक्षी प्रजातियों की उपस्थिति देखी गई है। इनमें से कई प्रजातियां शीतकालीन प्रवास के लिए चित्तौडग़ढ़ जिले के जलाशयों का आश्रय स्थली के रूप में पाई जाती है। यह इस बात को चिह्नित करता हैं कि जिले की भौगोलिक स्थिति, जलाशयों की उपस्थिती, भोजन की उपलब्धता व कम मानवीय हस्तक्षेप इन प्रजातियों का अपनी और आकर्षित कर रहा हैं। इन प्रजातियों का रहता है प्रवास: जिले में शीतकाल के दौरान कई देशों की पक्षी प्रजातियां आती है। इनमें मुख्य रूप से ग्रेटर फ्लेमिगों, डालमीशियन पेलीकल, ब्राडन हेडेड गल, ब्लेक विंग स्टील्ट, सेन्ड पाइपर्स प्रजातिया, रेड शेंक, करल्यू, कॉमन क्रेन, पोचार्ड, नार्दन पिनटेल, शोवलर, मालार्ड, गढ़वाल, रूडी शेलडक, बिटर्न, ग्रीन शेन्क, येलो वेकटेल, स्टार्क इत्यादि, कदम हंस शामिल है। इनमे सबसे अधिक ऊंचाई 23 हजार फीट पार कर आने वाला पक्षी कदम हंस भी हैं। यह पक्षी प्रजातियां यूरोप, रूस, चीन, बर्मा, अफगानिस्तान आदि प्रदेशों से 10 हजार मील से भी अधिक यात्रा कर चित्तौडग़ढ़ पहुंचती हैं। गौरतलब है कि भारत से कोई भी पक्षी प्रजाति प्रवासन के लिए अन्य देशों में नहीं जाती। हानिकारक रासायनिक किटनाशकों, कृषि में अत्यधिक रासायनिक उर्वरक को जलीय प्रदूषण मानवीय हस्तक्षेप व जलाशयों का अत्यधिक खनन कम कर दिया जाए तो हम इन प्रजातियों के अस्तित्व को बचाने में अपना योगदान दे पाएंगे। इस कार्य में डॉ. मोहम्मद यासीन के साथ डॉ. सुनिल दुबे, कुलदीप शर्मा, नेहा दशोरा, हिमानी जैन, अभिषेक सनाढ्य, यश पटवारी, राजाराम शर्मा आदि शामिल है। हिंदुस्थान समाचार/अखिल/संदीप/पवन
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