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अब प्लास्टिक कचरे से बिजली बनाएगी उत्तर प्रदेश सरकार

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 13 2018 8:43PM
अब प्लास्टिक कचरे से बिजली बनाएगी उत्तर प्रदेश सरकार
लखनऊ, 13 अक्टूबर (हि.स)। ताज नगरी में ऊर्जा संयन्त्र को ठोस कचरे से चलाने के बाद उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने नवाबों के शहर लखनऊ में बिजली संयन्त्र में ईंधन के रूप में प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। यह र निजी एवं सार्वजनिक साझेदारी या पीपीपी मोड के तहत स्थापित किया जाएगा। यह 100 करोड़ रुपये का संयन्त्र इंदौर में चल रहे संयन्त्र के मॉडल के आधार पर तैयार किया जाएगा। शहर की नव निर्वाचित मेयर संयुक्ता भाटिया ने हाल ही में इंदौर का दौरा किया था, जो देश के सबसे स्वच्छ शहरों में से एक है। मेयर और अन्य अधिकारियों ने वहां के संयन्त्र को देखा और उसके परिचालन को देख संतुष्ट भी हुए। उसी के बाद यहां के लिए उसी तरह के संयन्त्र की स्थापना के लिए प्रस्ताव दिया गया था। इसे दो दिन पहले कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया। चीन की एक कंपनी, इकोग्रीन के साथ इसके लिए बातचीत की जा रही है, जो इस संयन्त्र को पर्याप्त कच्चा माल मुहैया करायेगी, वह इस पुराने शहर में कचरा इकट्ठा करती है। इस संयुक्त उद्यम वाली कंपनी के साथ प्रतिदिन 1500 टन कचरा इकट्ठा करने के लिए समझौता किया गया है। इसके द्वारा एकत्र किए गए कचरे में प्लास्टिक अवशेष का हिस्सा ज्यादा होता है I एक अन्य कंपनी इससे पहले यह कार्य कर रही थी परन्तु उसके द्वारा समझौते की कुछ शर्तों का उल्लंघन करने के कारण उसके साथ करार खत्म कर दिया गया था। इन दिनों ईंधन की कीमतों में बहुत तेजी से वृद्धि हुई है। केंद्र और राज्य सरकार को ईंधन आपूर्ति का वैकल्पिक स्रोत ईजाद करना पड़ा है। यह संयन्त्र इसमें कुछ योगदान देगा और तेल आयात के बिलों को कम करने में मदद करेगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले ही चीनी मिलों के उप-उत्पाद, बगास के अलावा गन्ने के रस से पेट्रोल-ग्रेड इथेनॉल बनाने के लिए परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। आगरा में स्थापित होने वाले संयन्त्र को एक अलग उद्देश्य के लिए नई सरकार की मंजूरी मिली है। इसे ठोस अपशिष्ट से बिजली उत्पन्न करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यहां बिजली उत्पादन के लिए कचरे के रूप में एकत्रित पोलिथिन, पत्थर और धातु को पहले अलग किया जाएगा। 350 करोड़ रुपये की लागत की इस परियोजना को एक चेक कंपनी द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। यह 500 टन कचरे से 10 मेगावाट बिजली उत्पादन करेगा, जिसके लिए राज्य बिजली वितरण कंपनी के साथ एक समझौता पहले ही हो चुका है। बिजली वितरण कंपनी के द्वारा प्रति यूनिट 6.9 रुपये की दर से बिजली खरीदी जाएगी। पिछली सरकार ने भी ठोस कचरे से ऊर्जा उत्पादन के लिए एक नीति तैयार की थी। एक अमेरिकी कंपनी ने 2013 में तत्कालीन विकास मंत्री से मुलाकात की थी और राज्य में कचरे से ऊर्जा इकाई स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की थी। हालांकि बाद में इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं सुना गया। हिन्दुस्थान समाचार/आर.नारायण/राम सॉ/सुरभि सिन्हा /दधिबल
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