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जान हथेली पर लेकर पानी का दरिया पार कर शिक्षा हासिल करते हैं बच्चे

By HindusthanSamachar | Publish Date: Sep 16 2018 8:38PM
जान हथेली पर लेकर पानी का दरिया पार कर शिक्षा हासिल करते हैं बच्चे
पन्‍ना, 16 सितम्‍बर (हि.स.)। आजादी के 70 साल भी मध्य प्रदेश का बुन्देलखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रोंं की हालत मे सुधार नहींं हो पाया विकाश के दावोंं के नाम पर जमीनी हाकीकत कुछ और भी है स्वास्थ शिक्षा जैसे मौलिक अधिकारोंं से आज भी बुन्देल खण्ड के कई इलाके बदहाली मेंं है पन्ना जिले के अजयगढ तहसील मुख्यालय से ल्रगभग 30 किलो मीटर की दूरी पर खोरा से भदैया के लगभग 1 दर्जन गावं के लोग बाघिन नदी पर पुल के आभाव के कारण जान हाथेली मेंं लेकर नदी को पार करने मजबूर है। जानकारी के अनुसार बाघिन नदी के उस पार भदैया, काजीपूर, रमना, मकरी, भखूरी, कठगाय, केवटपुर, देवरी, गडरियनपुरवा इत्यादि गावं एव मजरो के लोग निवास करते है जिनके लिए अपने गावं से ग्राम खोरा एवं शहर के आने जाने के लिए महज एक ही रास्ता है जो बाघिन नदी से होकर गुजरता है। प्राथमिक के बाद हायर सेंकण्डरी के लिये प्रतिदिन 200 छात्र जान हथेली पर रख पार करते हैं नदीः- इस नदी मे पुल न होने के करण एक दर्जन लोग एवं बच्चे प्रतिदिन शिक्षा हासिल करने खोरा हाई सेकंडरी स्कूल नदी की धारा पार कर पढने के लिए आते है, क्योंकि इन गावं के लगभग 200 छात्र छात्रओं को यदि प्राथमिक शिक्षा के बाद आगे की शिक्षा हासिल करनी है तो उन्हेंं नदी को पार करना ही पडेगा बारिश के वक्त सैकडो बच्चे जान हथेली मे रखकर शिक्षा ग्रहण कर नदी को पार करते हैं जिससे जान कर खतरा भी बना रहता है। बाघिन नदी के उस पार सेकडो लोग स्वास्थ शिक्षा एवं तमाम रोज मररा की जरूरी कामो के लिए प्रतिदिन नदी को पार करते है क्योकि उस के सामने अब यह रोज की मजबुरी बन चूकी है बाघिन नदी मेंं पुल की माग को लेकर अजयगढ क्षेत्रिय विकास सधं के सयोजक श्रीराम पाठक के साथ सेकडो ग्रामीण पुल की माग को लेकर जल सत्याग्रह आंदोलन एवं राष्ट्रपति से लेकर राज्यपाल एवं प्रदेश सरकार से पुल की माग भोपाल से की जा चुकी है, लेकिन आज तक इस नदी मे पुल का निर्माण नही हो पाया नेता जनप्रतिनिधि महज प्रशासन महज अश्वासन का भरोसा ही दिया गया वर्तमान मे पदस्त प्राचार्य आर के अनुरागी का कहना है कि बाघिन नदी के उस पार एक दर्जन गावं के लगभग दो सौ छात्र छात्रओ को प्राथमिक शिक्षा के बाद कठनाई भरे नदी के पानी को प्रतिदिन पार करना पडता है तेज बारिश के समय पडने वाले छात्र छात्राओ की शिक्षा पर बुरा असर यहा तक की कुछ छात्र छात्रओ अपनी पढाई भी समय से पहले बदं कर देते है। एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंंत्री प्रदेश मेंं आपने भाजे भांजियोंं के लिए शिक्षा की अलख जालने का डिडोरा पीट रहे हैंं तो दूसरी जमीनी हकीकत यह है की जान जोखिम मेंं डालकर पढ़़ने लिखने और आगे बढ़़ने को बच्चे मजबूर हैंं। हिन्‍दुस्‍थान समाचार/सुरेश/रोहित/राजू
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