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ओजोन का क्षरण पृथ्वी के लिए खतरे की घंटी : अनुप्रिया

By HindusthanSamachar | Publish Date: Sep 16 2018 8:40PM
ओजोन का क्षरण पृथ्वी के लिए खतरे की घंटी : अनुप्रिया
मीरजापुर, 16 सितम्बर (हि.स.)। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री व जिले की सांसद अनुप्रिया पटेल ने धरती और उस पर जीने वाले सिर्फ मानव ही नहीं बल्कि हर जीव-जन्तु, पेड़-पौधे, जल तथा वायु की सुरक्षा के लिए भौतिक संसाधनों के संतुलित प्रयोग के साथ अधिकाधिक बरगद तथा पीपल जैसे प्रकृति-संरक्षक वृक्षों के लगाए जाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ओजोन परत का क्षतिग्रस्त होना खतरे की चेतावनी है। अनुप्रिया पटेल विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर वन विभाग द्वारा जिला पंचायत सभागार में रविवार को आयोजित संकल्प गोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने उपस्थित लोगों से वचन लिया कि हर कोई अपने घर के आसपास अधिक आक्सीजन देने वाले वृक्षों को लगाएंगे तथा गंगा में न गन्दगी बहाएंगे और न किसी को बहाने देंगे। उन्होंने कहा कि ओजोन का क्षरण पृथ्वी वासियों के लिए खतरे की घंटी है, जिस पर मंथन करने की जरूरत है। अन्धाधुन्ध भौतकीयकरण ही प्रकृतिक के साथ सामंजस्य न बैठा पाना ही ओजोन परत के क्षरण का मुख्य कारण है। मुख्य वन संरक्षक डॉ. प्रभाकर दुबे ने ओजोन के लाभ और क्षरण से हानि के बारे में हुए वैज्ञानिक शोधों पर प्रकाश डाला। डॉ. दुबे ने कहा कि इस दिशा में वन विभाग सतर्क है और सरकार की नीतियों से लोगों को अवगत करा रहा है। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए अपना दल एस के जिलाध्यक्ष रमाकांत पटेल ने गांव और शहर के जीवन में अन्तर से होने वाले क्षति की चर्चा की। उन्होंने कहा कि धनाढ्य व्यक्तियों का जीवन 65 वर्ष से ज्यादा नहीं देखा जाता। इसका कारण भौतिक वस्तुओं का प्रयोग शहरों में ज्यादा होता है। गोष्ठी का संचालन पंकज शुक्ल ने किया। हिन्दुस्थान समाचार/गिरजा शंकर/दीपक
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