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टॉपर घोटाला के बाद स्कूलों की मान्यता रद्द करने के आदेश को हाई कोर्ट ने किया निरस्त

By HindusthanSamachar | Publish Date: Jul 14 2018 12:04AM
टॉपर घोटाला के बाद  स्कूलों की  मान्यता रद्द करने के आदेश को  हाई कोर्ट ने किया निरस्त
पटना, 13 जुलाई (हि.स.)। टॉपर घोटाले के बाद राज्य के सैकड़ो स्कूलों की मन्यता एक साथ रद्द किये जाने संबंधी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के चेयरमैन के आदेश को पटना हाई कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा दायर पचास से ज्यादा एलपीए (अपील) पर एक साथ सुनवाई करते हुए शुक्रवार को उसे खारिज कर दिया। अदालत ने परीक्षा समिति के कार्रवाई को गैर क़ानूनी करार देते हुए स्कूलों की मान्यता को रद्द करने संबंधी समिति के चेयरमैन के आदेश को निरस्त कर कानून के तहत कार्रवाई करने का आदेश दिया है। खंडपीठ ने कहा कि बोर्ड सिर्फ चेयरमैन से ही नहीं होता है। बोर्ड का अर्थ है चेयरमैन सहित अन्य अधिकारी की सहभागिता भी। बोर्ड में कोई भी निर्णय लेने का अधिकार सिर्फ चेयरमैन को नहीं है। निर्णय लेने में बोर्ड के अन्य अधिकारी की सहमति लेने का भी कानून में प्रावधान बनाया गया है। कोई भी व्यक्ति या पद कानून से ऊपर नहीं है। खंडपीठ ने कहा कि बोर्ड को जो भी कार्रवाई करनी है वो कानून के तहत करें। केखंडपीठ ने स्कूलों के संबद्धता से सम्बंधित सभी मामले को बोर्ड के समक्ष रखने का आदेश दिया। साथ ही खंडपीठ ने बोर्ड को कहा कि वह कानून के तहत स्कूलों को मान्यता देने के बारे में करवाई करें। सुनवाई के दौरान बोर्ड की ओर से महाधिकता ललित किशोर ने कोर्ट को बताया कि बोर्ड के पूर्व चेयरमैन ने बगैर संसाधनों वाले स्कूलों को मान्यता दी थी, लेकिन जांच के दौरान स्कूलों में कई खामिया पाई जाने के कारण उनकी मान्यता रद्द कर दी गई। वही स्कूलों की ओर से अधिवक्ता अरुण कुमार ने कोर्ट को बताया की स्कूलों की मान्यता देने और रद्द करने के लिए कानून में प्रावधान है लेकिन बोर्ड के चेयरमैन ने कानून को नज़र अंदाज़ कर अपने स्तर से स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी। हिन्दुस्थान समाचार/ द्विवेदी सुरेन्द्र/चंदा
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