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43 फीसदी कम बारिश के बावजूद खरीफ फसल के लिये पर्याप्त नमी : मौसम वैज्ञानिक

By HindusthanSamachar | Publish Date: Jul 13 2018 9:49PM
43 फीसदी कम बारिश के बावजूद खरीफ फसल के लिये पर्याप्त नमी : मौसम वैज्ञानिक
कानपुर, 13 जुलाई (हि.स.)। हवाओं की दिशाएं पूर्वी न होने के चलते इस वर्ष उत्तर प्रदेश में मानसून सामान्य नहीं रहा और 43 फीसदी बारिश कम हुई। लेकिन बीच-बीच में होती रही बारिश धान को छोड़कर सभी खरीफ फसलों के लिये खेतों में पर्याप्त नमी बनी हुई है, जिससे किसान लगातार दलहनी और तिलहनी फसलों की बुआई कर रहा है। यह बातें खास बातचीत में चन्द्रशेखर आजाद कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कृषि मौसम वैज्ञानिक डा. नौशाद खान ने कही। कृषि मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि उत्तर प्रदेश में मई माह में सामान्य तौर पर 14.4 मिलीमीटर बारिश होती है उसके सापेक्ष इस वर्ष आठ मिलीमीटर ही बारिश हो सकी। इसी तरह जून माह में 84.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिये पर 63.4 मिलीमीटर बारिश हुई। इसी तरह जुलाई माह में 11 तारीख तक हवाओं की दिशायें पूर्वी न होने के चलते 83.6 मिलीमीटर के सापेक्ष 33.2 मिलीमीटर बारिश हो सकी। कुल मिलाकर 57 फीसदी बारिश हुई यानी 43 फीसदी बारिश कम हुई। लेकिन इतनी बारिश खरीफ की फसलों में धान को छोड़कर बुआई के लिये खेतों में पर्याप्त नमी है। ऐसे में किसान भाई सभी दलहनी व तिलहनी फसलों की बुआई समय-समय पर करते रहें। यह कतई भ्रम न रखें कि बारिश कम है और फसल के उत्पादन पर प्रभाव पड़ेगा क्योंकि आने वाले दिनों बारिश इन फसलों के लिये पर्याप्त हो जायेगी। कहा कि इतनी नमी में खेतों पर बीज पड़ा रहेगा तो फसल होकर ही रहेगी और किसान किसी के बहकावे में मत आयें। इन फसलों की बुआई जुलाई के अन्तिम सप्ताह तक की जा सकती है। हालांकि बुन्देलखण्ड के कुछ क्षेत्रों में नमी की मात्रा कम है पर बुआई की जा सकती है। वहीं जब धान की फसल के विषय में पूछा गया तो बताया कि धान की नर्सरी 20 जून के आस-पास डाली जाती है और 10 जुलाई तक जो डाटा सामने आया है उसके मुताबिक 97 फीसदी नर्सरी पड़ चुकी है। जिससे धान की फसल पर भी अधिक नुकसान नहीं होगा क्योंकि अब इसकी रोपाई आने का समय हो गया है और इसके लिये जरूरी तेज मानसूनी बारिश भी होने वाली है। सोयाबीन की सबसे ज्यादा हुई बुआई कृषि मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि खरीफ फसलों की बुआई बराबर हो रही है। जिसमें 10 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक धान 28 फीसदी लग गया है। मक्का 48 फीसदी, ज्वार 25 फीसदी, बाजरा 15 फीसदी, उड़द 20 फीसदी, मूग 27 फीसदी, अरहर 25 फीसदी, मूंगफली 45 फीसदी और तिल की 28 फीसदी बुआई हो चुकी है। इन दलहनी और तिलहनी फसलों में सोयाबीन की बुआई का प्रतिशत सर्वाधिक यानी 70 फीसदी है। कहा इन फसलों की बुआई एक जुलाई से प्रारम्भ होकर अन्तिम सप्ताह तक आसानी से की जा सकती है। हिन्दुस्थान समाचार/अजय/संजय
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