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छात्रों ने अन्तर्राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं का निरीक्षण कर, शोध कार्यो को जाना

By HindusthanSamachar | Publish Date: Jun 14 2018 9:45PM
छात्रों ने अन्तर्राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं का निरीक्षण कर, शोध कार्यो को जाना
इलाहाबाद, 14 जून (हि.स.)। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के संयुक्त तत्वाधान में खुले सत्र का आयोजन उच्च माध्यमिक छात्रों के लिए गुरूवार को किया गया। जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों के 220 से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया। साथ ही ट्रिपल आईटी झलवा में स्थापित उच्च अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शोध प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया एवं वहां हो रहे शोध कार्यों को भी करीब से जाना। समर स्कूल कार्यक्रम के प्रतिभागियों के एक दिनी संस्थान भ्रमण के उद्घाटन सत्र में संस्थान के निदेशक प्रो. पी नागभूषण ने आज के छात्रों को सिर्फ परीक्षा उत्तीर्ण करने और उच्च अंकों को पाने वाला बताया। उन्होंने छात्रों को कक्षाओं के बंद दरवाजों से बाहर आने का आवाह्न किया, जिससे उनकी असली प्रतिभा निखर सके। उन्होंने देश में मौजूदा वर्तमान परीक्षा प्रणाली में उच्च अंक प्राप्त करने की गला काट प्रतियोगिता पर ध्यान केन्द्रित करने के बजाय वास्तविक शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों को वैज्ञानिक और गंभीर रुप से सोचने और अधिक प्रश्न उठाकर अपनी अप्रत्याशित क्षमता का पता लगाने की सलाह दी। भारतीय छात्रों के बीच प्रतिभा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के बच्चे विशेष रुप से गणित के क्षेत्र में सर्वाधिक आगे हैं। उनकी इस प्रतिभा का वर्तमान परीक्षा प्रणाली में सिर्फ अंक प्राप्त हो जाता है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। वैज्ञानिक प्रो. कृष्णा मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी इलाहाबाद, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी नई दिल्ली और भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंग्लोर की स्थापना का उद्देश्य भारतीय वैज्ञानिकों को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर लाना था क्योकि अंग्रेज भारतीय वैज्ञानिकों के कार्य को दुनिया के समक्ष लाना नहीं चाहते थे। उन्होंने बताया कि 1930 में प्रो. मेघनाद साहा ने अपनी सभी शाखाओं में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रचार-प्रसार के लिए इलाहाबाद में नासी की स्थापना की जो आज अपने लक्ष्य को सफलता पूर्व अर्जित कर रहा है। प्रो.उमा शंकर तिवारी अधिष्ठाता मानव कल्याण ने छात्रों को अपने व्यक्तित्व को पूरी तरह विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। कहा कि नौकरियों से लोग नहीं पहचाने जाने चाहिये, बल्कि अपने ज्ञान और कर्म से पहचाने जाएं। कहा कि लोग अपनी रचनात्मकता से जाने जाते हैं न कि डिग्रियों से। प्रो.शेखर वर्मा अधिष्ठाता, आईआरपी ने गणना पर एक रोचक वार्ता प्रस्तुत किया। एसोसिएट प्रोफेसर डा.पवन चक्रवर्ती ने छात्रों को ट्रिपल आईटी इलाहाबाद की प्रयोगशालाओं और महत्वपूर्ण शोध कार्यों के बारे में जानकारी दी। नासा के डा.संतोष शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापित किया। डा.सुनील यादव के मार्गदर्शन में स्टेडियम में एक ड्रोन भी प्रदर्शित किया गया। उद्घाटन सत्र में डा. सी.बी अक्की, डा.शिशु वर्मा, डा.प्रीतिश भारद्वाज, डा.सतीश सिंह आदि उपस्थित रहे। हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त/राजेश
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